
महापुरुषों के आदर्श देते हैं सीख
नागौर. जयमल जैन पौषधशाला में चल रहे चातुर्मास के अंतर्गत शुक्रवार को जयगच्छीय स्वामी चांदमल महाराज का स्मृति दिवस एकासन तप के साथ मनाया गया। इस दौरान दोपहर 2 से 3 बजे तक जयगच्छीय स्वामी परंपरा पर आधारित प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें अनेक श्राविकाओं ने भाग लिया। इस प्रकार शनिवार को स्वामीवर्य हरकचंद का जन्म दिवस एकासन तप के साथ मनाया जाएगा तथा दोपहर 1 से 2 बजे तक आत्म उत्थान के लिए जाप द्वारा साधना का आयोजन तथा 2 बजे से आचार्य सम्राट जयमल महाराज के जीवन पर क्विज प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। प्रवचन सभा में डॉ. समणी सुयशनिधि ने कहा कि महापुरुषों का व्यक्तित्व बाह्य एवं आंतरिक रूप से विकास प्राप्त करता है। उन्होंने कहा कि उत्तराध्ययन सूत्र के अनुसार स्वाध्याय एक ऐसा उपाय है, जिससे मन की एकाग्रता के कारण सब दु:खों से मुक्ति मिल सकती है। इस बात को आत्मसात करते हुए स्वामिवर्य ने स्वाध्याय के साथ दूसरा गुण उनके मन में रमाया था, वह है लोक कल्याण की भावना। उनका विश्वास था कि जो व्यक्ति दूसरों के सुख व कल्याण का प्रयत्न करता है, वह स्वयं भी सुख एवं कल्याण को प्राप्त करता है। तीसरा गुण है उनका धर्माधारित मुनि जीवन। वे उग्र विहारी, उग्र तपस्वी व उग्र साधक हुए। जीवन में प्रमाद व शिथिलाचार के लिए कोई स्थान ही नहीं था। इस दौरान संजय पींचा ने बताया कि सम्पूर्ण 3 दिवसीय कार्यक्रम की प्रवचन प्रभावना, दर्शन प्रतिमा, एकासन आयोजन व प्रतियोगिता पुरस्कारों के लाभार्थी शांतिदेवी, उत्तमचंद सेठिया परिवार रहा।
Published on:
17 Nov 2018 06:28 pm
बड़ी खबरें
View Allनागौर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
