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जिस जमीन पर मकान देने के लिए हाउसिंग बोर्ड ने मांगे आवेदन, उस पर हो गया कब्जा

- नागौर के ताऊसर रोड पर बेशकीमती 27 बीघा जमीन पर कुछ लोगों ने की तारबंदी, प्रशासन बना मूकदर्शक - सांसद हनुमान बेनीवाल ने मुख्यमंत्री सहित यूडीएच मंत्री को लिखा पत्र, भाजपा के पूर्व प्रदेश महामंत्री ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर मुख्यमंत्री को दी जानकारी

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नागौर. शहर के ताऊसर रोड स्थित जिस जमीन पर हाउसिंग बोर्ड ने 188 मकान बनाकर देने का सपना दिखाकर लोगों से आवेदन लिए थे, उस पर कुछ लोगों ने पिछले तीन दिन में खाई खुदवाकर तारबंदी कर दी। इसकी जानकारी होने के बावजूद हाउसिंग बोर्ड के आवासीय अभियंता नागौर छोडकऱ चले गए। ऐसे में जिन लोगों ने मकान के लिए आवेदन किया था, उनकी नींद उड़ी हुई है। हाउसिंग बोर्ड सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ईडब्ल्यूएस, एलआईजी, एमआईजी अ व ब श्रेणी के मकानों के लिए 1300 से अधिक आवेदन भरे गए थे, जिनसे हाउसिंग बोर्ड ने एक करोड़ से अधिक रुपए फीस के वसूले।

गौरतलब है कि ताऊसर रोड स्थित करीब 27 बीघा जमीन के मालिकाना हक से जुड़ा केस सुप्रीम कोर्ट में जीतने के बाद राजस्थान हाउसिंग बोर्ड ने मार्च-अप्रेल 2024 में लोगों को आवास बनाकर आवंटित करने के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे थे। हाउसिंग बोर्ड ने ‘मंडल का है यह सपना, सुंदर घर हो सबका अपना’ का स्लोगन दिया था। इसमें कुल 188 मकानों के लिए आवेदन मांगे गए, जिनमें मध्यम आय वर्ग-अ के 58 एवं मध्यम आर्य वर्ग-ब के 24 मकानों सहित आर्थिक दृष्टि से कमजोर आय वर्ग के 58 एवं अल्प आय वर्ग के 48 मकानों के लिए आवेदन मांगे।

सांसद बेनीवाल ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र, एसओजी से जांच करवाने की मांग

राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के अध्यक्ष व नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने नागौर शहर में ताऊसर रोड पर आवासन मंडल को आवंटित बेशकीमती जमीन पर भू-माफियाओं की ओर से जबरन कब्जा करने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सहित यूडीएच मंंत्री व मुख्य सचिव को पत्र लिखा है। बेनीवाल ने इस मामले को लेकर जिला प्रशासन नागौर व उपखंड अधिकारी नागौर की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े किए हैं।मुख्यमंत्री शर्मा को लिखे पत्र में सांसद ने बताया कि जिला प्रशासन ऐसे माफियाओं के आगे बेबस नजर आ रहा है। चूंकि उक्त भूमि पर राजस्थान आवासन मंडल ने भूखंड देने की योजना निकाल रखी है और लोगों ने आवेदन भी कर दिए, जिसके एवज में आवेदन शुल्क भी लोगों ने जमा करवाया है। उन्होंने बताया कि इस भूमि पर वर्षों पूर्व लोगों ने अवैध रूप से नामांतरण करवाया, लेकिन उस नामांतरण को जिला स्तर से लेकर हाईकोर्ट व सर्वोच्च न्यायालय ने गलत नामांतरण करवाने वालों के खिलाफ अपना निर्णय दिया था, लेकिन भू-माफियाओं ने अधिकारियों से व कुचामन की तत्कालीन अतिरिक्त जिला कलक्टर कलक्टर से मिलीभगत कर ली। इसको लेकर सांसद बेनीवाल ने मुख्यमंत्री से मांग की कि इस संवेदनशील मामले में राज्य सरकार तत्काल प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करवाकर जांच एसओजी से करवाए।

तत्कालीन जिला कलक्टर व तत्कालीन कुचामन एडीएम पर लगाए आरोप

सांसद बेनीवाल ने कहा कि इस जमीन के नामांतरण से जुड़ी पत्रावली में एडीएम न्यायालय कुचामन सिटी ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को ताक पर रखकर भू-माफियाओं को संरक्षित करने वाला जो निर्णय दिया, उससे न्याय व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल खड़ा होता है। वहीं तत्कालीन जिला कलक्टर ने भी इस पत्रावली को किस विधिक आधार पर कुचामन ट्रांसफर किया, यह जांच का विषय है। सांसद ने कहा कि आवासन मंडल ने जिस भूखंड पर लोगों को मकान बनाने लिए आवेदन मांगे, उन आवेदनों पर लोगों ने शुल्क के साथ आवेदन भर दिए, लेकिन लॉटरी निकालने का समय आया तो माफियाओं ने खाई खोदकर तारबंदी कर दी और प्रशासन के अधिकारी मूकदर्शक बने रहे। बेनीवाल ने कहा कि पूर्ववती सरकार के समय भी कुछ राजनेताओं ने इन भूमाफियाओं की मदद की। वहीं वो ही नेता अब फिर से वर्तमान सरकार की सत्ता का चोला ओढकऱ ऐसे भू-माफियाओं की मदद कर रहे हैं।

बाड़ ही खेत को खा रही - छाबा

भाजपा के प्रदेश महामंत्री रहे हाउसिंग बोर्ड निवासी जगवीर छाबा ने रविवार को सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री सहित संबंधित अधिकारियों को टैग करते लिखा कि जब बाड़ ही खेत खाने लगेगी तो फसल कैसे बचेगी। उन्होंने लिखा कि शहर के ताऊसर रोड पर वर्षों से खाली पड़ी करोड़ों रुपए की कीमती जमीन का सुप्रीम कोर्ट में केस जीतने के बाद हाउसिंग बोर्ड ने पिछले दिनों मकान आवंटन करने के लिए लोगों से आवेदन मांगे, जिस पर सैकड़ों लोगों ने हाउसिंग बोर्ड से मकान लेने के लिए निर्धारित फीस चुकाकर आवेदन भरे। अब जब लॉटरी का समय आया तो यहां कुछ निजी लोगों ने 27 बीघा जमीन के चारों तरफ खाई खोदकर तारबंदी कर दी। यह काम कोई रात में नहीं किया गया है, बल्कि दिनदहाड़े किया गया है और जिम्मेदार अधिकारी देखते रहे। यदि यही होना था तो आवासन मंडल ने आम जनता को इस जमीन के चक्कर में क्यों उलझाया। आवासन मंडल को कोई हक नहीं बनता है कि गरीब जनता की गाढ़ी कमाई को अपने कब्जे में लेकर चुपचाप बैठ जाए। उन्होंने कहा कि उन्होंने पहले भी 2013 में घटिया निर्माण करने पर हाउसिंग बोर्ड के खिलाफ मोर्चा खोला था और अब भी वापस वही करने की जरूरत पड़ी तो पीछे नहीं हटेंगे।

प्रशासन का सहयोग मिला नहीं

हाउसिंग बोर्ड की जमीन पर खाई खोदकर कब्जा करने के संबंध में आवासीय अभियंता केएल निनाणिया से बात की तो उन्होंने बताया कि हमने पुलिस एवं प्रशासन को अवगत कराया, लेकिन हमें सहयोग मिला नहीं। इसलिए मैंने उच्चाधिकारियों को पत्र लिखकर नागौर छोड़ दिया है। इस सम्बन्ध में बोर्ड के अन्य अधिकारियों से बात करने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।