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डांगावास में “शाहजहां’ और “मुमताज’ के प्रेम की कहानी…

- यहां छोटे से "ताजमहल' में लगा है पत्नी का स्टेच्यू- मोहब्बत का प्रतीक : यहां शाहजहां: मोहनराम जाखड़ ने मुमताज- माडी देवी की याद में बनवाया ताजमहल: स्मारक

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डांगावास में

मेड़ता सिटी. स्मारक में लगाया गया स्वर्गीय पत्नी का स्टेच्यू।

पत्रिका : खास खबर

राधेश्याम शर्मा

मेड़ता सिटी. आगरा में स्थित ताजमहल को तो पूरा देश ही नहीं बल्कि दुनिया भी जानती है, जहां शाहजहां ने अपनी पत्नी मुमताज की याद में ताजमहल बनवाया था। लेकिन आज हम आपको नागौर जिले में एक मोहब्बत के प्रतीक यानी यूं कहे तो मिनी ताजमहल के बारे में बताते हैं। जो स्थित है मेड़ता से सटे डांगावास गांव में। डांगावास के वर्तमान के "शाहजहां' मोहनराम ने अपनी "मुमताज' यानी मोडी देवी की याद में एक छोटा सा 'ताजमहल' यानी स्मारक बनवाया है। जिसमें उनकी स्वर्गीय पत्नी का स्टेच्यू भी लगा है।

उनकी पत्नी की मौत 15 जनवरी 2012 को हो गई थी। दुनिया छोड़ने से पहले उन्होंने अपने पति से ख्वाहिश जताई कि वह कोई ऐसी इमारत बनवाए, जो भविष्य में उनके प्यार की याद दिलवाएं और यूं कहे तो उनके नाम को जिंदा रखे। जिसे पूरा करने के लिए राजस्व सेवा में भू-राजस्व निरीक्षक रहे और वर्तमान में पेंशनर समाज के अध्यक्ष मोहनराम जाखड़ ने स्मारक बनवाना शुरू कर दिया। प्रदेश में अपने स्वर्गवासी पिता और दादा की याद में मूर्तियां तो हर कोई लगवाता है और उसके लिए बड़े-बड़े कार्यक्रम भी होते हैं लेकिन पत्नी की याद में स्मारक बनवाना एक अनोखी पहल है। मोहनराम ने कुछ ही समय में घर के अंागन में एक स्मारक तैयार करके उसमें अपनी पत्नी की मूर्ति स्थापित करवा दी। जाखड़ ने यादों को मूर्त रूप में संजोकर रखने के लिए कुछ अलग ही सोचा। उन्होंने पुरुष प्रधान समाज की परम्पराओं से हटकर अपनी पत्नी की मूर्ति बनवाकर अपने घर के आहाते में स्थापित करवा दी।

यात्रियों को आकर्षित करता है स्मारक का स्टेच्यू
डांगावास स्थित नागौर डेयरी के स्थानीय संयंत्र के पास घर के बाहर यह स्टेच्यू स्थापित है। जो अजमेर-नागौर जाने वाले यात्रियों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करता है। कभी बादशाह शाहजहां ने अपनी पत्नी मुमताज के लिए ताजमहल बनवाया था और अब नागौर के "माथासिरा" के नाम से पहचाने जाने वाले गांव डांगावास में इस तरह का प्रयास एक पति ने अपनी पत्नी के प्रति प्रेम और सम्मान में किया है।

आइए, मोहनराम से ही जानते है स्टेच्यू बनवाने के पीछे का मकसद

वर्तमान पेंशनर समाज के अध्यक्ष जाखड़ ने बताया कि बरसों के साथी के बिछुड़ने के बाद अकेलेपन का अहसास तो होता ही है। ऐसे में जीवन साथी की यादों को मूर्त रूप में संजोकर रखने से दिल को एक तसल्ली हुई है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति के जीवन में सबसे लंबा साथ पति पत्नी का ही रहता है और यह मूर्ति उस साथ को आज भी कायम रख रही है।


सीख यह भी...
जाखड़ ने अपनी पत्नी की याद में स्मारक और स्टेच्यू बनवाया। लेकिन वो चाहते है कि इससे प्रेरित होकर महिला सम्मान और बराबरी का भाव समाज में पनपे। एक मां, ***** और पत्नी के रूप में महिला का परिवार में योगदान भुलाया नहीं जा सकता है। दुनिया में बुरे वक्त में जब हर कोई साथ छोड़ देता है तब पत्नी पति का साथ देती है। ऐसे रिश्ते को सम्मान दिया जाने से समाज में महिलाओं के प्रति नजरिये में बदलाव आएगा।