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12वीं बोर्ड रिजल्ट में बदली तस्वीर: प्रतिशत ऊंचा, लेकिन रैंक की जंग में नागौर पिछड़ा, डीडवाना-कुचामन बना नया ’टॉपर जिला’

राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा घोषित इस वर्ष के परिणामों में सबसे बड़ा संदेश यही है कि अब केवल अच्छा प्रतिशत पर्याप्त नहीं है, बल्कि दूसरे जिलों से बेहतर प्रदर्शन ही असली पैमाना बन चुका है

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एआई तस्वीर

नागौर.12वीं बोर्ड परीक्षा परिणाम ने इस बार एक दिलचस्प ट्रेंड सामने रखा है—अंक बढ़ रहे हैं, लेकिन रैंक की दौड़ और भी कठिन होती जा रही है। नागौर जिले का परिणाम भले ही 98 प्रतिशत से ऊपर रहा हो, लेकिन प्रदेश स्तरीय प्रतिस्पर्धा में यह मजबूती रैंक में नहीं बदल सकी। वहीं, डीडवाना-कुचामन जिले ने इसी प्रतिस्पर्धा में बढ़त बनाते हुए खुद को ‘नया टॉपर जिला’ साबित कर दिया।

राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा घोषित इस वर्ष के परिणामों में सबसे बड़ा संदेश यही है कि अब केवल अच्छा प्रतिशत पर्याप्त नहीं है, बल्कि दूसरे जिलों से बेहतर प्रदर्शन ही असली पैमाना बन चुका है।

प्रतिशत अच्छा, लेकिन रैंक फिसली

नागौर जिले का विज्ञान संकाय में 98.47 प्रतिशत परिणाम किसी भी मायने में कमजोर नहीं कहा जा सकता, लेकिन यही आंकड़ा प्रदेश में उसे 10वें स्थान तक ले गया। पिछले साल 99.39 प्रतिशत के साथ तीसरे स्थान पर रहा नागौर इस बार सीधे सात पायदान नीचे आ गया।

यह गिरावट बताती है कि अन्य जिलों ने प्रदर्शन में ज्यादा तेजी से सुधार किया है। खासकर डीडवाना-कुचामन ने 99.43 प्रतिशत परिणाम के साथ प्रदेश में पहला स्थान हासिल कर नागौर को पीछे छोड़ दिया।

डीडवाना-कुचामन का “क्वालिटी जंप”

डीडवाना-कुचामन का उभार इस परिणाम की सबसे बड़ी कहानी बनकर सामने आया है। विज्ञान में पहला, कला में तीसरा स्थान हासिल कर इस जिले ने यह संकेत दिया है कि यहां शिक्षा का स्तर तेजी से मजबूत हुआ है। पिछले साल जहां यह जिला विज्ञान में नागौर से पीछे था, वहीं इस बार उसने न केवल अंतर खत्म किया बल्कि शीर्ष पर पहुंच गया।

कला में स्थिरता, लेकिन टॉप से दूरी

कला संकाय में नागौर का प्रदर्शन संतुलित रहा। 98.38 प्रतिशत परिणाम के साथ जिले ने 7वां स्थान हासिल किया, जो पिछले साल के 9वें स्थान से सुधार है। हालांकि, अगर पिछले वर्षों के ट्रेंड को देखें तो नागौर 2023 में दूसरे स्थान तक पहुंच चुका है, लेकिन उसके बाद लगातार टॉप-3 से बाहर बना हुआ है। वहीं डीडवाना-कुचामन ने 98.58 प्रतिशत के साथ तीसरा स्थान हासिल कर टॉप-3 में अपनी जगह मजबूत कर ली है।

वाणिज्य में उलट तस्वीर

वाणिज्य संकाय में तस्वीर थोड़ी अलग है। यहां नागौर ने 99.01 प्रतिशत के शानदार परिणाम के बावजूद 18वां स्थान पाया, जो दर्शाता है कि इस संकाय में प्रतिस्पर्धा और भी ज्यादा कड़ी है। डीडवाना-कुचामन का परिणाम 85.93 प्रतिशत रहा और वह 33वें स्थान पर रहा, यानी इस संकाय में वह पीछे रहा।

बेटियों की निरंतर बढ़त

इस साल भी छात्राओं ने विज्ञान और कला दोनों संकायों में छात्रों से बेहतर परिणाम देकर अपनी श्रेष्ठता साबित की। नागौर में विज्ञान वर्ग में छात्राओं का प्रतिशत 98.99 रहा, जबकि छात्रों का 98.09 प्रतिशत रहा। इसी तरह कला में भी छात्राएं आगे रहीं। यह ट्रेंड न केवल शिक्षा में बेटियों की बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है, बल्कि उनके बेहतर प्रदर्शन की निरंतरता को भी मजबूत करता है।

जल्दी आया रिजल्ट, बढ़े अवसर

इस बार बोर्ड ने सभी संकायों के परिणाम करीब 50 दिन पहले जारी कर दिए। इसका सीधा फायदा विद्यार्थियों को मिलेगा, क्योंकि अब उन्हें कॉलेज प्रवेश और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा।

आंकड़ों में छिपा बड़ा संदेश

अगर पूरे परिणाम को एक नजर से देखा जाए तो साफ है कि अब शिक्षा में “हाईस्कोरिंग” आम हो चुकी है। लगभग हर जिला 95-99 प्रतिशत के बीच परिणाम दे रहा है। ऐसे में असली फर्क “मार्जिन” और “कंसिस्टेंसी” से पड़ रहा है। नागौर के लिए चुनौती यह है कि वह अपने अच्छे प्रतिशत को बेहतर रैंक में बदले, जबकि डीडवाना-कुचामन के लिए यह प्रदर्शन बनाए रखना बड़ी कसौटी होगा।

आगे क्या?

शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार अब स्कूल स्तर पर गुणवत्ता, नियमित मॉनिटरिंग और परीक्षा रणनीति पर ज्यादा ध्यान देना होगा। नागौर को जहां अपनी पुरानी टॉप रैंकिंग वापस लाने की चुनौती है, वहीं डीडवाना-कुचामन के सामने खुद को लगातार शीर्ष पर बनाए रखने की जिम्मेदारी है। कुल मिलाकर, यह परिणाम केवल अंक नहीं, बल्कि बदलती प्रतिस्पर्धा और शिक्षा के नए मानकों की कहानी भी बयां करता है।