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जनता बोली: नगरपरिषद ने ध्यान दिया नहीं, बरबाद कर दिया पार्क, बच्चे कहां खेलने जाएं अब

नागौर. शहर पुरानी कॉलोनियों में शुमार ताऊसर रोड स्थित हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के कई चेहरे बदल गए,लेकिन यहां पर सेक्टर नंबर एक के पार्क की तकदीर नहीं बदली। विशेष बात यह है कि इस पार्क की तीन ओर की पूरी चारदीवारी गायब हो चुकी है। एक ओर की आधी और टूटी हुई बची हुई है। […]

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नागौर. शहर पुरानी कॉलोनियों में शुमार ताऊसर रोड स्थित हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के कई चेहरे बदल गए,लेकिन यहां पर सेक्टर नंबर एक के पार्क की तकदीर नहीं बदली। विशेष बात यह है कि इस पार्क की तीन ओर की पूरी चारदीवारी गायब हो चुकी है। एक ओर की आधी और टूटी हुई बची हुई है। बस्तियों के बीच बने इस पार्क को अब अघोषित तौर पर डम्पिंग यार्ड बना दिया गया है। यहां पर आवारा भटकते पशुओं के साथ ही अब कचरा फेका जाने लगा है। बीच कॉलोनी में पार्क की इस बेकद्री से लोगों केा अब इस पर अवैध रूप से अतिक्रमण होने की आशंका होने लगी है। इसके साथ ही इस पूरे क्षेत्र का पर्यावरण भी अब बिगडऩे लगा है।
शहर के ताऊसर रोड स्थित हाउसिंग बोर्ड में यहां पर लोगों की बसावट के दौरान ही बसे लोगों की तकदीरें तो बदल गई, लेकिन इसके सेक्टर नंबर एक के पार्क की तकदीर नहीं बदली। बताते हैं कि शुरू में तो पार्क की स्थिति वर्तमान की अपेक्षा ज्यादा बेहतर थी, लेकिन रखरखाव के अभाव में हालत बिगड़ती चली गई। इसके चारों ओर की चारदीवारी में तीन ओर से चारदीवारी अप्रत्याशित रूप से न केवल गायब हो गई, बल्कि इस चारदीवारी में लगी ईटें भी कहां चली गई। इसकी जानकारी किसी को नहीं है। जबकि एक ओर की चारदीवारी का अब केवल आधा हिस्सा रह गया है। यह भी टूटने के कगार पर है। स्थिति देखने से लग रहा है कि यह भी कुछ दिनों में गायब हो जाएगी।
आवारा पशुओं का बना डेरा
पार्क का रखरखाव न होने की वजह से इसकी हालत खराब होने के साथ ही अब इसमें इधर-उधर भटकते पशुओं का डेरा लगने लगा है। हालांकि कुछ पेड़ जरूर बचे हुए हैं, लेकिन इनकी भी स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। स्थानीय बाशिंदों की माने तो पहले यहां पर दो दर्जन से ज्यादा पेड़ और सुंदर फूलों के पौधे लगे हुए थे। धीरे-धीरे सभी सभी गायब होते चले गए। अब इस जगह पर एक भी फूलों का पौधा नहीं बचा है।
अघोषित डम्पिंग यार्ड बनाया
पार्क की चारदीवारी तीन ओर से गायब होने के साथ ही इस जगह को अब अघोषित रूप से डम्पिंग यार्ड बना दिया गया है। यहां पर काफी मात्रा में कचरा एकत्रित हो चुका है। बताते हैं कि पिछले कई सालों से इस पूरे पार्क की सफाई तक नहीं कराई गई। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि इस संबंध में स्थानीय जनप्रतिनिधि से कई बार आग्रह किया गया, लेकिन इस पार्क का नाम सुनते ही भडक़ जाते हैं।
नगरपरिषद को करना था व्यवस्थित
शहर के पार्कों के रखरखाव के साथ ही उनको पूर्ण रूप से व्यवस्थित करने की जिम्मेदारी नगरपरिषद के पास रहती है। परिषद की ओर से पिछले दस सालों के दौरान इस पार्क को व्यवस्थित करने के लिए एक धेला तक खर्च नहीं किया गया। परिषद के अधिकारियों से बातचीत करने का प्रयास किया गया तो उनका कहना था कि शहर के पार्कों की देखरेख भामाशाहों एवं परिषद के सहयोग से करने का प्रावधान है, लेकिन इस पार्क पर कितना पैसा, और कब खर्च किया गया। इसकी जानकारी अधिकारी नहीं दे पाए।
विशेष …….
जनता बोली: नगरपरिषद ने ध्यान दिया नहीं, बरबाद कर दिया पार्क, बच्चे कहां खेलने जाएं अब
हाउसिंग बोर्ड के इस पार्क की तकदीर दस साल बाद भी नहीं बदली
-पार्क की चादीवारी ही गायब कर दी
-टूटी, फूटी दीवारों के साथ परिसर में जमा गंदगी के बीच लावारिश पशुओं का बना डेरा, पार्क को बना दिया अघोषित डंपिंग यार्ड
-दस सालों में इस पार्क पर नगरपरिषद ने एक धेला तक खर्च नहीं किया, और न ही इसका रखरखाव कराया, खाली भूमि पर अतिक्रमण की बढ़ी आशंका

जनता कहिन…
पार्क में हमेसा लावारिश पशुओं का डेरा बना रहता है। इसकी वजह से भी यहां पर गंदगी रहती है। पार्क में कहीं पर भी बैठने की स्थिति लायक जगह नहीं है। अब समझ में नहीं आता है कि सुकून के पल बिताने के लिए कहां जाएं।
आर. पी. यादव, हाउसिंग बोर्ड, स्थानीय नागरिक
इस पार्क में तो हरियाली कभी नहीं देखी। इस पूरे क्षेत्र में लोगों के पास हरियाली के वातावरण में बैठने के लिए यही एकमात्र पार्क था,लेकिन रखरखाव के अभाव में अब पार्क हालत बेहद खराब हो चुकी है।
धर्मेन्द्र टेलऱ, हाउसिंग बोर्ड, स्थानीय नागरिक
बेहद विडंबनापूर्ण स्थिति कि बच्चों के लिए खेलने तक की जगह इस क्षेत्र में नहीं रह गई है। पार्क की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि सामान्य हालात में भी वहां पर बैठना तो मुश्किल है, फिर खेलने के लिए कौन बच्चा जाएगा।
रेणू अरोड़ा, गृहणी, स्थानीय नागरिक हाउसिंग बोर्ड
समझ में नहीं आता है कि जब प्रत्येक प्रकार का टेक्स जनता जमा करती है तो फिर उनको मूलभूत सुविधाएं क्यों नहीं मिलती है। प्रत्येक कॉलोनी या बस्ती में एक पार्क का होना अनिवार्य है। इसके बिना कोई कॉलोनी नहीं बन सकती है तो फिर इस कॉलोनी का पार्क का गायब हो गया है।
लीलादेवी पारीक, स्थानीय नागरिक हाउसिंग बोर्ड