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सिलाई के हुनर ने सुनिता को बनाया ‘आत्मनिर्भर’ परिवार का बनी ‘सहारा’

- 700 से अधिक जरूरतमंद महिलाओं को दे चुकी है सिलाई का प्रशिक्षण

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 सिलाई के हुनर ने सुनिता को बनाया ‘आत्मनिर्भर’ परिवार का बनी ‘सहारा’

कुचामनसिटी. बालिकाओं को सिलाई कार्य का प्रशिक्षण देती सुनीता चौधरी।

कुचामनसिटी. शहर की 34 वर्षीय सुनीता चौधरी ने सिलाई को अपनी आजीविका का साधन बनाया। आज वह न केवल आत्मनिर्भर है, बल्कि अपने परिवार का भी सहारा बनी हैं। सिलाई के माध्यम से सुनीता को घर खर्च जितनी आय भी हो रही है और वह क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। वह शहर में सिलाई सेन्टर भी संचालित करती है। गरीब, जरूरतमंद बालिकाओं एवं महिलाओं को प्रशिक्षण भी दे रही हैं।

कमजोर आर्थिक स्थिति ने छुड़ाई पढ़ाई, हुनर से मिली सफलता
सुनीता बताती है कि मौलासर में उनका मायका है। पिता राधेश्याम बोचलिया गांव में खेती करते है ग्रेजुएशन तक पढ़ाई की है, लेकिन आर्थिक परिस्थिति ठीक नहीं होने से आगे पढ़ाई नहीं कर सकीं। इसके बाद 2011 में कुचामन शहर के एक सिलाई सेंटर पर सिलाई सीखी।

सिलाई सेन्टर पर ही बैग , ब्लाउज, सलवार शूट, लहंगा सहित अन्य कपड़े सिलना सीखा । बाद में घर पर सिलाई का काम शुरू किया। छुटपुट सिलाई करने से 100 से 150 रुपए प्रतिदिन कीआय होने लगी। बाद में स्वंय ने सिलाई सेन्टर खोल लिया।
10 वर्षों से दे रही सिलाई प्रशिक्षण

सुनीता पिछले 10 वर्षों से आर्थिक रूप से कमजोर बालिकाओं व महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रही हैं। करीब 700 से अधिक बालिकाओं व महिलाओं को सिलाई सिखाकर उन्हें अपने पैरों पर खड़ा कर चुकी है। इनमें से कई महिलाएं आज घर से बाहर निकल कर बैग, सलवार सूट, गाऊन, राजपूती पोशाक, शूट, लहंगा, पटियाला सूट की सिलाई कर रही है। उनका कहना है कि आज प्रत्येक नारी को स्वालम्बी व जागरूक बनने की आवश्यकता है। जागरूक महिला ही समाज को नई दिशा दे सकती है। महिला समाज में खुद की पहचान रखें। समाज व परिवार के लिए बोझ नहीं बनकर स्वाधीन व कुशल हो तथा परिवार का सहारा बने।