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नागौर जिले से तीन जने बने आईएएस, इनमें दो बेटियां, पढि़ए पूरी रिपोर्ट

- सिविल सर्विसेज की परीक्षा-2022 में टॉप 4 स्थानों पर लड़कियों ने कब्जा जमाया  

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नागौर जिले से तीन जने बने आईएएस

नागौर जिले से तीन जने बने आईएएस

नागौर. संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा में लड़कियों ने फिर बाजी मारी है। नागौर जिले से भी तीन जनों का सलेक्शन हुआ है, जिसें दो बेटियां हैं। ऑल इंडिया भी सिविल सर्विसेज की परीक्षा में टॉप 4 स्थानों पर लड़कियों ने कब्जा जमाया है। मंगलवार को संघ लोक सेवा आयोग की ओर जारी सिविल सेवा परीक्षा के रिजल्ट में बेटियों की कामयाबी से उनके परिजनों के साथ-साथ चाहने वालों में खुशी की लहर दौड़ गई है। मंगलवार को जारी यूपीएससी परीक्षा के रिजल्ट को आप UPSC की ऑफिशियल वेबसाइट upsc.gov.in पर चेक कर सकते हैं।

संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की ओर से मंगलवार को जारी सिविल सेवा परीक्षा-2022 के फाइनल परिणाम में नागौर की तीन प्रतिभाओं का आईएएस में चयन हुआ है। इनमें दो बेटियां व एक बेटा शामिल है। मंगलवार को परिणाम जारी होते ही सोशल मीडिया पर चयनित होनहारों को बधाई देने का दौर शुरू हो गया। रिश्तेदारों एवं परिजनों ने अभ्यर्थियों को मिठाई खिलाकर बधाई दी।

मेड़ता की मुदिता ने स्कूली शिक्षा सरकारी स्कूल से की

जानकारी के अनुसार सिविल सेवा परीक्षा में 381वीं रैंक पर मेड़ता की बेटी मुदिता शर्मा का चयन हुआ है। मुदिता के पिता भगवतीलाल शर्मा सरकारी स्कूल में प्रधानाचार्य के पद पर कार्यरत होने के साथ मेड़ता के चतुर्भुजनाथ एवं मीरा मंदिर के पुजारी भी हैं। उनका कहना है कि बेटी को यह मुकाम चारभुजा नाथ की कृपा और उसकी कड़ी मेहनत से ही मिल पाया है। मुदिता शुरू से ही पढ़ाई में होशियार थी। माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की 10वीं की परीक्षा में मुदिता ने पूरे प्रदेश में 15वें स्थान पर रहकर मेरिट में स्थान बनाया था। उसने 10वीं की पढ़ाई बालिका उच्च माध्यमिक स्कूल और 11वीं व 12वीं की पढ़ाई मेड़ता रोड के सरकारी स्कूल से पूरी की। वर्ष 2019 में मुदिता ने एमबीबीएस किया। एमबीबीएस पूरी करने के बाद कोरोना काल में नि:शुल्क चिकित्सा सेवाएं भी दी। कुछ समय तक जयपुर में प्राइवेट जॉब करने के बाद मुदिता भारतीय सिविल सेवा की तैयार में जुट गई और मुकाम हासिल किया। मुदिता 5 भाई बहनों में तीसरे नंबर पर है। बड़ी बहन मधुबाला डेंटल सर्जन हैं। दूसरी बहन विद्या जयपुर में रहती है। मुदिता से छोटा एक भाई और एक बहन भी है।


ढाणी में रहते हैं प्रेमसुख, सेल्फ स्टडी से पाई सफलता
परबतसर. परबतसर उपखण्ड क्षेत्र के ग्राम जावला के अंतर्गत दड़िया की ढाणी निवासी प्रेमसुख दड़िया ने भारतीय सिविल सेवा परीक्षा में 486वीं रैंक हासिल कर ढाणी का नाम रोशन किया है। इस छोटी-सी ढाणी की आबादी महज 250 है। खास बात यह है कि प्रेमसुख ने सेल्फ स्टडी कर दूसरे प्रयास में सफलता प्राप्त की है। उनके पिता मोतीराम दड़िया खेड़ी में सैकंड ग्रेड शिक्षक हैं और माता गृहिणी हैं। प्रेमसुख की प्रारंभिक शिक्षा गांव के सरकारी स्कूल में हुई। प्रेमसुख ने खेड़ी के नीलकंठ प्राथमिक विद्यालय में पढ़ाई शुरू की। राजस्थान यूनिवर्सिटी से स्नातक करने के बाद वर्ष 2019 में पहली बार प्रेमसुख आईएएस की तैयारी करने दिल्ली पहुंचे, तभी कोरोना ने दस्तक दे दी। इस बीच कोरोना बाधा बना तो प्रेमसुख दिल्ली से वापस ढाणी लौट आए। तब उन्होंने ढाणी में रहकर ही पढ़ाई जारी रखी। हिंदी मीडियम के प्रेमसुख 2021 में पहले प्रयास में इंटरव्यू तक पहुंचे, लेकिन चयन नहीं हुआ। उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और इस बार सफलता मिली।

किसान की बेटी बनी आईएएस

जिले से तीसरा चयन मूण्डवा तहसील क्षेत्र के खुड़खुड़ा कलां निवासी मैना खुड़खुडि़या का हुआ है, जिसमें 613वीं रैंक प्राप्त की है। मैना का गत वर्ष सहायक वन संरक्षक के पद पर चयन हुआ था । वह वर्तमान में प्रशिक्षण प्राप्त कर रही है। शुरू से ही पढ़ाई में अव्वल रहने वाली मैना के पिता रामनिवास खुड़खुडि़या साधारण किसान और माता गृहिणी है। मैना सहित छह भाई-बहिन हैं। सबसे बड़ा भाई शंकर पिता के साथ खेती कर करता है, ताकि छोटे भाई-बहन पढ़ सके। इसकी बदौलत एक भाई दिनेश वायु सेना में तथा भाई सुनील लिपिक बना है। मैना ने वर्ष 2013 में दसवीं बोर्ड परीक्षा में प्रदेश में दसवां तथा नागौर जिले में पहला स्थान प्राप्त किया था। उसी समय उसने आईएएस बनने का लक्ष्य तय किया। 12वीं कक्षा तक गांव के निजी विद्यालय में पढ़ने के बाद मैना ने अकेले जयपुर में रहकर स्नातक की पढ़ाई पूरी की और पिछले पांच साल से आईएएस की तैयारी कर रही थी। इस दौरान मैना के बड़े भाई व स्कूल व्याख्याता नथूराम खुड़खुडि़या का मार्गदर्शन लगातार उसे मिलता रहा। मंगलवार को भारतीय सिविल सेवा परीक्षा 2022 का परिणाम आया तो खुड़खुड़ा कलां व खुड़खुड़ा खुर्द गांव में खुशी का माहौल हो गया।