
आयुषी सोनी, पिता राधेश्याम सोनी के साथ
नागौर. ‘बेटी ने दसवीं परीक्षा करते ही नीट की कोचिंग करने की ख्वाहिश जाहिर कर दी, लेकिन घर की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि कोचिंग संस्थानों की भारी-भरकम फीस अदा कर सकूं। इसी दौरान नीट का परिणाम आया और अखबार में एक जरूरतमंद बच्चे का इंटरव्यू छपा, जिसमें उसने बताया कि प्रदीप ग्वाला ने उसे नि:शुल्क पढ़ाया। खबर पढऩे के बाद हमारे अंदर भी एक उम्मीद की किरण जगी, लेकिन मन में यह डर भी था कि क्या कहेंगे।
फिर यह सोच कर कि ज्यादा से ज्यादा मना करेंगे, हिम्मत करके बेटी को लेकर संस्कार एकेडमी पहुंचा। ग्वाला से मिला तो उन्होंने आयुषी की पढ़ाई की जिम्मेदारी उन पर छोडऩे की बात कहकर बोझ हल्का कर दिया। पिछले चार साल में मैंने केवल कॉपी-किताबों के पैसे दिए।’ यह कहना है कि नीट में 672 अंक प्राप्त करने वाली छात्रा आयुषी के पिता राधेश्याम सोनी का। नागौर परतानियों की गली, बालसमंद में रहन सोनी ने बताया कि उनके पास आज भी मोटरसाइकिल नहीं है, रात को बच्ची 10 बजे तक कोचिंग में पढ़ती तो दूसरों की मोटरसाइकिल मांग कर जाता और उसे घर लाता, लेकिन आज बेटी ने उनका सिर ऊंचा कर दिया है। राधेश्याम सोनी ने बताया कि चार साल में ग्वाला ने एक रुपया फीस नहीं ली, बस हमेशा पढऩे की बात करते रहे।
बाड़मेर के डॉक्टरों से हुए प्रेरित
नागौर जिले के जरूरतमंद और प्रतिभावान विद्यार्थियों को नि:शुल्क कोचिंग देने के साथ अन्य सामाजिक कार्यों के उद्देश्य को लेकर बनाए गए रूरल-21 फाउण्डेशन ने पहले ही वर्ष एमबीबीएस में तीन बच्चों को प्रवेश दिलाया है। रूरल-21 के फाउण्डर प्रदीप ग्वाला ने बताया कि बाड़मेर के फिफ्टी विलेजर व बिहार के सुपर-30 की तर्ज पर उन्होंने रूरल-21 फाउण्डेशन बनाया, ताकि वे उन विद्यार्थियों को नीट व आईआईटी की नि:शुल्क तैयारी करवा सकें, जो प्रतिभावान तो हैं, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के चलते कोचिंग की महंगी फीस वहन नहीं कर सकते। ऐसे विद्यार्थियों के लिए करीब डेढ़ साल पहले शुरू किए गए इस फाउण्डेशन के तहत वर्तमान में 15 विद्यार्थियों को नीट व आईआईटी की नि:शुल्क कोचिंग दी जा रही है।
दो दिन पूर्व जारी किए गए नीट के परिणाम में चयनित हुए रूरल-21 के तीन विद्यार्थियों से पत्रिका की विशेष बातचीत -
अखबार में पढ़ा तो हिम्मत करके चले गए
नीट में 672 अंक प्राप्त करने वाली आयुषी सोनी के पिता राधेश्याम सोनी सुनारी का काम करते हैं। आयुषी ने बताया कि वर्ष 2014 में उसके ताऊजी की बेटी का एमबीबीएस में चयन हुआ तो उसने भी डॉक्टर बनने की ठान ली। 11वीं में एकेडमी के प्रबंध निदेशक प्रदीप ग्वाला के पहुंची तथा पढऩे की इच्छा जताई तो उन्होंने सहर्ष नि:शुल्क पढ़ाने की स्वीकृति दी। 11वीं, 12वीं पढऩे के बाद दो साल नीट की तैयारी की और इस बार अच्छे अंक प्राप्त कर लिए। आयुषी की मां कलावती गृहणी हंै।
पैसे थे नहीं, जानकार ने दिखाया रास्ता
नागौर शहर के कांगरवाड़ा में रहने वाले गुलाबचंद मेघवाल के पुत्र सुरेन्द्र ने नीट में 651 अंक प्राप्त कर एससी केटेगरी में 84 रैंक हासिल कर अंडर-100 की सूची में स्थान बनाया है। सुरेन्द्र ने बताया कि 10वीं के बाद उसे डॉक्टर बनने के लिए कोचिंग करनी थी, लेकिन पिता कपड़े की दुकान में मुनीम का काम करते हैं, इसलिए आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं थी, जो भारी-भरकम फीस चुका सकें। इसी दौरान उसके जानकार पटवारी महेन्द्र पंवार ने रूरल-21 का रास्ता दिखाया। यहां तीन साल तक नि:शुल्क पढ़ाई करने के बाद इस बार चयन हो गया।
कमठा मजदूर का बैठा बनेगा डॉक्टर
रूरल-21 फाउण्डेशन के तहत नीट की तैयारी करने वाले छात्र भगवान सांचौरिया ने भी पहले ही साल अपने पिता का सपना सच कर दिया है। भगवान के पिता बुधाराम मेघवाल कमठे का काम करते हैं, आर्थिक स्थिति ज्यादा ठीक नहीं होने के कारण कोचिंग की फीस चुकाने में असमर्थ थे, लेकिन बच्चा होशियार था, इसलिए फाउण्डर प्रदीप ग्वाला से सम्पर्क किया। उन्होंने नि:शुल्क कोचिंग देने की स्वीकृति दी तो भगवान ने भी उन्हें निराश नहीं किया और पहले ही प्रयास में 499 अंक प्राप्त कर एससी केटेगरी में 3211 रैंक हासिल कर ली।
इसलिए दिया रूरल-21 नाम
फाउण्डर प्रदीप ग्वाला ने बताया कि परिवहन विभाग ने भी नागौर को आरजे 21 कोड दिया है। नागौर के युवा मजबूती में 21 ही साबित होते हैं। अब शिक्षा के क्षेत्र में 21 बने, इसलिए रूरल-21 फाउण्डेशन नाम दिया गया।
Published on:
11 Sept 2022 12:04 pm
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