
Nagaur. Medicinal plants growing in Gogelav Nursery
नागौर. जिले के घरों में अब जल्द ही औषधीपरक पौधे नजर आएंगे। वन विभाग की नर्सरियों में गिलोय एवं अश्वगंधा व तुलसी सरीखे पौधों को विकसित करने में वनकर्मी लगे हुए हैं। पौधों का वितरण योजनाबद्ध तरीके से चार से पांच चरण तक में किया जाएगा। पहला चरण जुलाई के बाद से चलेगा। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि योजना के तहत प्रत्येक घरों में औषधीपरक पौधों को लगवाना है। ताकी पर्यावरण के साथ लोगों की सेहत भी सही रहे। इस पूरे कार्य को अमलीजामा पहनाए जाने के लिए जिला स्तरीय टॉस्क फोर्स का गठन भी किया गया है। ताकी योजना के क्रियान्वयन में कोई बाधा न आ सके।
वन विभाग की ओर से घर-घर औषधी योजना के तहत तुलसी, अश्वगंधा, गिलोय एवं कालमेघ सरीखे पौधों का वितरण किया जाएगा। विभाग की ओर से स्थापित जिले की कुल 11 नर्सरियों में इनको सुव्यवस्थित करने का जिम्मा वनकर्मियों को सौंपा गया है। योजना के तहत पौधों का वितरण पहला, दूसरा, तीसरा, चौथा एवं पांचवें चरण में किया जाएगा। पांचवा चरण अंतिम चरण होगा। इसके लिए विभाग की ओर से चरणबद्ध तरीके से परिवारों की संख्या के आंकलन का काम भी पूरा कर लिया गया है। अकेले गोगेलॉव नर्सरी में ही साढ़े तीन लाख से ज्यादा पौधों को तैयार करने में कैटल गार्ड मनोहरसिंह राठौड़, प्रभुराम कस्वां एवं प्रभुराम हुड्डा की टीम लगी हुई है।
गोगेलॉव में नर्सरी में लगे पौधों का विवरण
औषधी पौधे संख्या
गिलोय 90000
अश्वगंधा 90000
तुलसी 90000
कालमेघ 90000
गिलोय खाने के लाभ
गिलोय का इस्तेमाल बुखार में एक आयुर्वेदिक दवा के रूप में लाभ पहुंचाता है. इसका इस्तेमाल डायबिटीज रोगियों के लिए बहुत सारे फायदे हैं. डायबिटीज में गिलोय का सेवन करने से ब्लड शुगर कंट्रोल रहता है और पाचन तंत्र बेहतर बनाता है. यह इम्यूनिटी बढ़ाने में भी मददगार होता है।
संक्रमण दूर करती है तुलसी
शरीर में ऊर्जा का प्रवाह तुलसी के नियमित सेवन से नियंत्रत रहता है, साथ ही व्यक्ति की उम्र भी बढ़ जाती है। एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल और एंटीबायोटिक गुण तुलसी में रहते हैं, जो शरीर को संक्रमण से लडऩे के काबिल बनाती है। घर में तुलसी का पौधा होने से वातावरण शुद्ध रहता है और तुलसी संक्रमण रोगों से लड़ती है।
अश्वगंधा की विशेषताएं
अश्वगंधा का सेवन करने से दिल संबंधित बीमारियों का खतरा कम हो जाता है क्योंकि इसमें पाए जाने वाले एंटीआक्सीडेंट और एंटीइंफ्लेमेटरी गुण कोलेस्ट्रॉल को कम करने में सहायक होते हैं. इसका सेवन से दिल की मांसपेशियां मजबूत होती है और बैड कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करता है।
कालमेघ का महत्व
कालमेघ का उपयोग मलेरिया, ब्रोंकाइटिस रोगो में किया जाता है। इसका उपयोग यकृत सम्बन्धी रोगों को दूर करने में होता है। इसकी जड़ का उपयोग भूख लगने वाली औषधि के रूप में भी होता है। कालमेघ का उपयोग पेट में गैस, अपच, पेट में केचुएँ आदि को दूर करता है।
इस तरह से होगा पौधों का वितरण
घर-घर औषधी योजना के तहत पहला चरण जुलाई में चलेगा, दूसरा चरण अक्टूबर में चलेगा। इसके बाद तीसरे वर्ष शतप्रतिशत लोगों को पौधे दिए जाएंगे। चौथे एवं पांचवें चरण पचास-पचास प्रतिशत पौधे प्रत्येक परिवार को मिलेगा। विभाग की ओर से पहले चरण में दो लाख 88 हजार परिवारों में पौधों का वितरण होगा। कुल पांच लाख 34 हजार परिवारों में इसके वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। कुल मिलाकर प्रत्येक परिवारों को सभी चरणों की समाप्ति तक आठ-आठ पौधे मिलेंगे।
इनका कहना है...
घर-घर औषधी योजना के तहत पांच चरण में कुल पांच लाख 34 परिवारों में पौधों का वितरण किए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। पहले चरण में ही ढाई लाख से ज्यादा परिवारों को पौधें मिलेंगे।
ज्ञानचंद मकवाना, उपवन संरक्षक नागौर
Published on:
11 Jul 2021 09:49 pm
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