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दो सालों में मूण्डवा तहसील में नहीं रोपा एक भी पौधा!

वन विभाग के अधिकारियों ने विधानसभा में लगाए गए सवाल के जवाब में दी जानकारी जिले में गत दो वर्षों पर रोधरोपण पर खर्च किए 8.73 करोड़ रुपए

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patrika newspaper campaign For plantation

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नागौर. जिले में वन विभाग ने गत दो सालों में पौधरोपण पर 8 करोड़ 73 लाख 31 हजार रुपए खर्च कर दिए, लेकिन मूण्डवा तहसील में पिछले दो साल में एक भी पौधा नहीं रोपा गया। यह जानकारी खुद वन विभाग के अधिकारियों ने खींवसर विधायक हनुमान बेनीवाल द्वारा विधानसभा में लगाए गए सवाल के जवाब में दी है। वन विभाग के तत्कालीन उप वन संरक्षक वेदप्रकाश गुर्जर द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार वित्तीय वर्ष 2016-17 व 2017-18 में जनवरी 2018 तक 8 करोड़ 73 लाख 31 हजार रुपए खर्च किए गए। यह बात और है कि पौने 9 करोड़ रुपए खर्च करने के बावजूद वन विभाग 10 प्रतिशत पौधों को भी नहीं बचा पाया।
एक लाख से अधिक पौधे लगाने का दावा
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार जिले के अकेले खींवसर क्षेत्र में एक लाख 2 हजार 482 पौधे रोपे गए। खींवसर विधानसभा की खींवसर तहसील के भूण्डेल ग्राम में 200, गुढ़ा भगवानदास में 282, आचिणा में 8400, नेणाउ में 10200, भोजास में 11400, देऊ में 12000, रामसर में 10800, पिपलिया में 9600, कांटिया में 2400, दांतीणा में 7800 व चावण्डिया में 7800 पौधों का रोपण वित्तीय वर्ष 2016-17 व 2017-18 में जनवरी 2018 तक किया गया।
विधानसभा में 1159.96 हैक्टेयर अवर्गीकृत वन क्षेत्र
विधायक बेनीवाल के सवाल पर मिले जवाब के अनुसार खींवसर विधानसभा के ग्राम कुचेरा में 186.17, खजवाना में 16.19, संखवास में 13.83, खुडख़ुड़ा खुर्द में 8.09, पांचोड़ी में 932.95, खींवसर में 2.73 हैक्टेयर अवर्गीकृत वन क्षेत्र है। यह बात और है कि इस वन क्षेत्र का मौके पर कोई अस्तित्व नहीं है और न ही ग्रामीणों को इसकी जानकारी है।
केवल जनता के धन की बर्बादी
वन विभाग के अधिकारियों का जवाब मिलने के बाद खींवसर विधायक हनुमान बेनीवाल ने कहा कि गत 2 वर्षों में मूण्डवा जैसी तहसील में पौधरोपण का कोई कार्य नहीं करना दुर्भाग्यपूर्ण है। आज पूरा विश्व पर्यावरण की समस्या से जूझ रहा है। विश्व स्वास्थ्य संघठन द्वारा प्रदूषण के सम्बन्ध में जारी आंकड़े चिंताजनक है, ऐसे में सरकारी योजनाओं के माध्यम से जनता के करोड़ों रुपए वन क्षेत्र के संरक्षण के नाम पर बर्बाद किए जा रहे हैं, जबकि धरातल पर कोई काम नहीं दिखाई दे रहा। मूण्डवा तहसील क्षेत्र भूजल के मामले में भी अतिदोहित की श्रेणी में शामिल हो चुकी है, जहां सबसे ज्यादा पौधरोपण की आवश्यकता है। ऐसे में सरकारी जिम्मेदारों के साथ-साथ आम आदमी को भी पर्यावरण संरक्षण के लिए आगे आना चाहिए।