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वसुंधरा का दौरा फ्लॉप शो रहा- सांसद बेनीवाल

-प्रेस कॉन्फ्रेंस नागौर. सांसद हनुमान बेनीवाल ने पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के नागौर दौरे को फ्लॉप शो बताया है। यहां की जनता ने वसुंधरा को नकार दिया है, चुनाव पास आए तो यहां दिखीं पर लोगों ने उनको कोई तवज्जो नहीं दी।

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प्रेस कॉन्फ्रेंस

शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत में एक सवाल पर बेनीवाल ने कहा कि गहलोत की रही हो या फिर वसुंधरा सरकार, आमजन को कोई फायदा नहीं पहुंचा पाई।

शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत में एक सवाल पर बेनीवाल ने कहा कि गहलोत की रही हो या फिर वसुंधरा सरकार, आमजन को कोई फायदा नहीं पहुंचा पाई। जमकर भ्रष्टाचार हुआ, अब ना भाजपा अपने कुनबे को संभाल पा रही है ना ही कांग्रेस। मुख्यमंत्री गहलोत के राहत कैम्प से जनता को कोई राहत नहीं मिल रही। गहलोत सरकार के खिलाफ बिगुल बजाने वाले सचिन पायलट का भी कोई स्टेण्ड समझ में नहीं आ रहा। रोजाना भले ही बयान बदल रहे हों पर यह साफ कर दिया कि वो कांग्रेस नहीं छोड़ पाएंगे। कांग्रेस सरकार को बचाने की वसुंधरा पर गहलोत की टिप्पणी यह बताने के लिए काफी है कि दोनों मिलाजुला खेल कर रहे हैं। वसुंधरा को नागौर दौरे के दौरान डर इतना था कि जिलेभर के हिस्ट्रीशीटर को अपने इर्दगिर्द कर रखा था। यह भी सही है कि वे इस यात्रा में रुकावट नहीं डालना चाहते थे, वे चुनौती देते हैं कि वसुंधरा चैलेंज करे तो विरोध भी दिखा देंगे। वसुंधरा किसकी छाती पर पैर रखने की धमकी देती है, जनता उसे सबक सिखाएगी। पायलट सत्ता के लिए घूम रहे हैं वहीं गहलोत सत्ता का दुरुपयोग कर रहे हैं। रालोपा भाजपा-कांग्रेस को छोड़कर अन्य दलों के साथ थर्ड फ्रंट बनाकर चुनाव लड़ेगा, आने वाले चुनाव में रालोपा सत्ता की धुरी का केन्द्र रहेगा। 22 मई को लूणकरणसर तो एक दर्जन से अधिक आंदोलन/सभा कर रालोपा हुंकार भरेगी। जिले में बढ़ते अपराध पर भी उन्होंने कांग्रेस सरकार को आड़े हाथों लिया। 19 नए जिले बनाने को हास्यास्पद बताते हुए कहा कि गहलोत का यह फार्मूला भी फेल रहा। भाजपा को छोडऩे का उन्हें कोई रंज नहीं है। आमजन/किसान हो या बेरोजगार की बात करने के लिए उन्हें कुछ भी त्यागना पड़ेगा तो त्यागेंगे। दिल्ली के जंतर-मंतर पर खिलाडिय़ों का आंदोलन केन्द्र सरकार के मुंह पर तमाचा है। वे खुद उनके समर्थन में जल्द दिल्ली जाएंगे।

पुलिस का दर्द भी सुनाया

जिले में अपराध पर पुलिस के ढीलेपन के एक सवाल पर सांसद ने कहा कि पुलिस के पास भी संसाधन कम हैं। कम कर्मियों के बीच तफ्तीश के साथ नेताओं की सभा/धरने-प्रदर्शन हो या फिर कोर्ट-कचहरी का काम। ऐसे में पुलिस भी क्या-क्या करे।