
Jakir husan
हेमन्त जोशी
कुचामन (नागौर). प्रदेश में चुनावी बिसात बिछने को तैयार है। नेता टिकट के जुगत में हैं तो पार्टियां दावेदारों की फेहरिस्त से जिताऊ और टिकाऊ उम्मीदवारों के नाम खंगाल रही है। भाजपा हो या कांग्रेस नागौर जिला सूबे की सियासत में दमदार दखल रखता है। जिले की दस विधानसभा सीटों पर कैसे तय होंगे विधायक उम्मीदवारों के चेहरे, संगठन कैसे निपटेंगे गुटबाजी से और तीसरे मोर्चे की आहट का किस पर कितना असर आएगा? कुछ ऐसे ही सवालों पर राजस्थान पत्रिका ने कांग्रेस जिलाध्यक्ष जाकिर हुसैन गैसावत से खास बातचीत की।
प्रश्न : कांग्रेस की सरकार बनी तो मुख्यमंत्री कौन होगा? जनता किसका चेहरा देखकर वोट करे?
- कांग्रेस हमेशा ही गरीब, किसान और आम जनता के विश्वास पर चुनाव लड़ती रही है। विधायक जिसे अपना नेता चुनते हैं वही मुख्यमंत्री बनता है। जनता पार्टी की सोच के आधार पर हमें वोट देगी।
प्रश्न : कांग्रेस ने मजबूत विपक्ष की भूमिका नहीं निभाई। आखिर जनता क्यों उसे वोट दे?
- पांच साल में हमने हर गलत निर्णय का विरोध किया है। चाहे वह महंगाई का मुद्दा हो या किसानों की समस्या हो। हिंगोनिया में गायों की मौत आदि पर सरकार को घेरा है। तभी जनता हमारे साथ है। माहौल कांग्रेस के पक्ष में है।
प्रश्न : नागौर जिले की कई विधानसभा में टिकट के दावेदारों की लंबी सूची है, ऐसे में बगावत रोकने के लिए पार्टी क्या करेगी?
- सभी को लग रहा है कि सरकार कांग्रेस की बन रही है तो जाहिर है काफी लोग टिकट की मांग कर रहे हैं। टिकट मिलने के बाद सभी पार्टी के साथ रहेंगे और बगावत की नौबत नहीं आएगी।
प्रश्न : खींवसर विधायक तीसरा मोर्चा बनाकर प्रत्याशी उतारने की तैयारी कर रहे हैं। कांग्रेस पर भी इसका असर आएगा। पार्टी डेमेज कंट्रोल कैसे करेगी?
- बेनीवाल के तीसरे मोर्चा से प्रदेश या नागौर जिले में कोई फर्क नहीं पड़ेगा। जनता केवल जिताऊ उम्मीदवार को ही वोट देगी। अब तक तो तीसरे मोर्चा का कोई चेहरा ही स्पष्ट नहीं है।
प्रश्न : कांग्रेस में गुटबाजी हावी है और डेगाना के पूर्व विधायक रिछपाल मिर्धा खुलेआम यह अंदेशा जता चुके हैं। गुटबाजी रोकने के लिए पार्टी क्या तैयारी कर रही है।
- हां पहले गुटबाजी थी, लेकिन जब से मुझे जिलाध्यक्ष बनाया गया, उसके बाद सचिन पायलट की अध्यक्षता में पहला निर्णय गुटबाजी खत्म करने का ही हुआ। अब कोई गुटबाजी नहीं है। सभी पार्टी के साथ हंै।
प्रश्न : पूर्व सांसद ज्योति मिर्धा ने राजनीति से दूरी बना ली है? क्या कांग्रेस उन्हें वापस लाने पर विचार करेगी?
- हां वे कुछ समय से अपने निजी और पारिवारिक कारणों के चलते राजनीति से दूर हैं, लेकिन पार्टी के प्रति समर्पित हैं। पार्टी के लिए आगे भी कार्य करेंगी। मिर्धा को चुनाव की कमेटियों में भी जिम्मेदारी दी गई है।
प्रश्न : मानवेन्द्र सिंह के कांग्रेस में आने के बाद जाट समाज में इसका रोष देखा जा रहा है। जाट समाज को संतुष्ट करने के लिए पार्टी क्या कदम उठाएगी?
- मानवेन्द्र सिंह के कांग्रेस में आने के बाद पार्टी को मजबूती मिली है। जाट समाज में रोष जैसी बात मेरे सामने नहीं आई है। हमारी पार्टी बहुत बड़ा समुद्र है जिसमें सभी समुदाय, वर्ग, जातियां शामिल है।
Published on:
22 Oct 2018 12:16 pm
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