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नागौर. नागौर नगर परिषद में सभापति कृपाराम सोलंकी व आयुक्त धर्मपाल जाट के बीच चल रहे विवाद ने सोमवार को तूल पकड़ लिया। नगर परिषद में पिछले काफी दिन से चल रहा विवाद जयपुर तक पहुंच गया। आयुक्त व सचिव नरेन्द्र बापेडिय़ा के समर्थन में जिलेभर की नगर परिषद व नगर पालिका के कर्मचारी व अधिकारी पेन डाउन हड़ताल पर उतर गए, वहीं प्रदेशभर में राजस्थान नगर पालिका प्रशासनिक सेवा परिषद के बैनर तले जिला मुख्यालयों पर कलक्टर को एवं जयपुर में स्वायत शासन मंत्री श्रीचंद कृपलानी को ज्ञापन दिए देकर नागौर सभापति को निलम्बित कर गिरफ्तार करने की मांग रखी गई। उधर, सभापति कृपाराम सोलंकी ने पार्षदों व समर्थकों के साथ कलक्टर कुमारपाल गौतम को ज्ञापन सौंपकर आयुक्त धर्मपाल जाट व सचिव नरेन्द्र बापेडिय़ा को निलम्बित कर दोनों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की मांग की। दोनों पक्षों द्वारा ज्ञापन देने के बाद कांग्रेसी पार्षद हरीराम जाखड़ ने भी अपने समर्थकों के साथ सभापति सोलंकी के खिलाफ कलक्टर को ज्ञापन देकर नगर परिषद में चल रहे भ्रष्टाचार व जमीनों पर किए गए अतिक्रमण की जांच कराने मांग की। अधिकारियों के पेन डाउन हड़ताल पर चले जाने के कारण सोमवार को बुलाई गई नगर परिषद बोर्ड की बैठक भी स्थगित हो गई। देर रात स्वायत्त शासन विभाग के निदेशक पवन अरोड़ा ने नगर परिषद आयुक्त धर्मपाल जाट को एपीओ कर मुख्यालय जयपुर कर दिया। उनका चार्ज नागौर एसीएम प्रभातीलाल जाट को सौंपा गया है।
कार्रवाई नहीं तो काम नहीं
शनिवार को सभापति सोलंकी व सचिव बापेडिय़ा के बीच हुए विवाद के बाद सोमवार को आयुक्त जाट के साथ जिले के स्थानीय निकाय कर्मचारी व अधिकारी कलक्टर को ज्ञापन देने पहुंचे। उन्होंने कलक्टर को सौंपे ज्ञापन में बताया कि नागौर नगर परिषद के सभापति कर्मचारियों व अधिकारियों को धमका रहे हैं और राजकीय कार्य में बाधा उत्पन्न कर रहे हैं। शनिवार को भी उन्होंने आयुक्त कार्यालय के गेट को लात मारी तथा सचिव को बाहर निकलने के लिए कहा। आयुक्त ने कलक्टर को बताया कि इसके विरोध में वे पेन डाउन हड़ताल पर हैं और जब तक उनकी सुरक्षा व आत्म सम्मान की रक्षा सुनिश्चित नहीं होगी काम नहीं करेंगे। उन्होंने सभापति को निलम्बित कर गिरफ्तार करने की मांग की।
कलक्टर से उलझे आयुक्त
ज्ञापन देने पहुंचे आयुक्त जाट कलक्टर से भी उलझ गए। उन्होंने पूरी घटना की जानकारी देते हुए कलक्टर से आत्म सम्मान को लेकर सवाल पूछ लिया। उन्होंने जब अपना प्रश्न दोहराया तो कलक्टर ने उन्हें कहा, 'भाषणबाजी मत करो।' इस पर आयुक्त ने कहा, 'भाषणबाजी नहीं कर रहा, अपनी बात रख रहा हूं।' कलक्टर बोले, 'आप लोगों ने तमाशा बना रखा है शहर का।' इस पर आयुक्त ने सीधा आरोप लगाया, 'हमने तमाशा नहीं बनाया, आपने और सभापति ने मिलकर बनाया है। हम अपनी बात कहने आए हैं, आप हमें इस तरह हड़का नहीं सकते।' कलक्टर ने कहा, 'आप अपनी बात रखिए।' इस पर आयुक्त ने कहा, 'जब तक हमारा आत्म सम्मान एवं हमारे कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक हम काम नहीं करेंगे।' इस पर कलक्टर ने भी कह दिया, 'मत करो काम, नहीं करना है तो।'
कलक्टर ने दोनों को लगाई फटकार
ज्ञापन देने के दौरान जब दोनों पक्षों ने अपनी बात रखनी शुरू की तो कलक्टर ने उन्हें फटकार लगाते हुए कहा कि आप लोगों की लड़ाई के कारण शहर का विकास ठप पड़ा है। पूरे शहर का माहौल खराब हो रहा है। सभापति द्वारा दूसरे अधिकारी को लगाने की बात कहने पर कलक्टर ने कहा कि वे पूरे मामले की जांच करवाएंगे और जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई करेंगे।
कर्मचारियों ने लिया तटस्थ रहने का निर्णय
दोपहर तक चले घटनाक्रम के बाद करीब तीन बजे राजस्थान नगर पालिका कर्मचारी फैडरेशन नागौर शाखा की बैठक हरिकिशन विश्नोई की अध्यक्षता में हुई, जिसमें सर्व सम्मति से पेन डाउन हड़ताल से अलग रहते हुए तटस्थ रहने का निर्णय लिया गया।
भाजपा पार्षदों ने की इस्तीफे की पेशकश
&शहर में विकास कार्य बेपटरी होने के विरोध में सोमवार को नगर परिषद के भाजपा पार्षदों ने भाजपा की सदस्यता से इस्तीफे की पेशकश की है। यदि जल्द ही विकास कार्य शुरू नहीं हुए तो भाजपा पार्षद भाजपा की सदस्यता से इस्तीफा दे देंगे।
ओमप्रकाश सांखला, नेता प्रतिपक्ष, नगर परिषद, नागौर
नगर परिषद आयुक्त एपीओ, एसीएम को सौंपा अतिरिक्त प्रभार
नागौर. नगर परिषद में चल रहे विवाद व सोमवार को कलक्टर से उलझने के बाद नगर परिषद आयुक्त को विभाग ने जयपुर बुला लिया गया। स्वायत्त शासन विभाग के निदेशक पवन अरोड़ा ने देर रात आदेश जारी कर नगर परिषद आयुक्त धर्मपाल जाट को एपीओ करते मुख्यालय जयपुर कर दिया। निदेशक अरोड़ा ने आयुक्त का चार्ज एसीएम प्रभातीलाल जाट को सौंपा है।
ढाई माह से शहर का विकास ठप
स्थानीय निकाय अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा ज्ञापन देने के बाद सभापति सोलंकी पार्षदों एवं समर्थकों के साथ नारेबाजी करते हुए कलक्ट्रेट पहुंचे तथा जिला कलक्टर को ज्ञापन देकर आयुक्त जाट व सचिव बापेडिय़ा को निलम्बित करने तथा दूसरे अधिकारी लगाने की मांग की। सभापति ने बताया कि सफाई कर्मचारियों की हड़ताल तुड़वाने के लिए गत 31 मई को बुलाई गई आपात बैठक का प्रस्ताव (भर्ती प्रक्रिया निरस्त करने का) जयपुर भेजने की बजाए रोक लिया तथा बैठक में सदस्यों की उपस्थिति का रजिस्टर ही गायब कर दिया। वित्त समिति अध्यक्ष मनोहरसिंह राठौड़, नेता प्रतिपक्ष ओमप्रकाश सांखला सहित अन्य समर्थकों ने कहा कि दोनों अधिकारियों की हठधर्मिता से शहर का विकास ढाई माह से ठप पड़ा है। ज्ञापन देने के बाद सभापति सहित उनके समर्थक पार्षद नगर परिषद में टेंट लगाकर धरने पर बैठ गए।
Published on:
12 Jun 2018 11:40 am
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