
पानी मेरा धंधा तेरा : पानी को तरसे शहरवासी, टैंकर मालिक कूट रहे चांदी
नागौर. शहर में आम आदमी पेयजल समस्या से त्रस्त है। जलापूर्ति व्यवस्था में जुटे नगर परिषद से जुड़े शहरी जलप्रदाय योजना के अधिकारियों को लोगों के इस संकट से कोई सरोकार नहीं है। शहरवासियो को घंटों इंतजार के बाद पाइप लाइनों से नाम मात्र का पानी मिल पाता है। शहरवासियों को हलक तर करने से लेकर दैनिक जरुरतों को पूरा करने के लिए टेंकर चालकों पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में गोगेलाव डेम से टेंकर से पानी सप्लाई करने वालों की चांदी है। बरसों पुरानी लाइनों में पानी अटक जाता है तो कहीं लाइनें फटने से अमृत व्यर्थ बह जाता है।
परिषद को थोंपी गई जिम्मेदारी
पूरे प्रदेश में 260 शहरों मे से 253 में जलदाय विभाग पानी की आपूर्ति करता है, जबकि केवल सात शहरों में नगर परिषद को पानी की व्यवस्था दी गई है। अधिकारियों व कर्मचारियों के वेतन का भुगतान व लाइन ठीक करने के लिए जॉइन्ट व सामान की आपूर्ति जलदाय विभाग से ही होती है। ऐसे में परिषद का तो केवल नाम है। पीएचईडी से पेयजलापूर्ति व्यवस्था परिषद को सुपुर्द करने के बाद से लोगों की परेशानियां बढ़ गई है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि जलापूर्ति व्यवस्था फिर से पीएचईडी को देने से ही समस्या का समाधान हो सकता है। इस संबंध में जिला कलक्टर दिनेश यादव भी सरकार को पत्र लिख चुके हैं।
पानी भरपूर, व्यवस्था नहीं
गोगेलाव हेड वक्र्स से पानी की आवक टंकियों में होती है। इसके बाद यहां से अलग-अलग जोन में पेयजलापूर्ति करनी होती है। कम दबाव के कारण पानी घरों तक नहीं पहुंच पाता है, ऐसे में मजबूर होकर लोगों को 500 या इससे अधिक रूपए देकर पानी का टैंकर मंगवाना पड़ रहा है। गोगेलाव डेम में 130 लाख लीटर पानी संग्रहण की क्षमता है और यहां दो घंटे तक इतना ही पानी संग्रहित कर रखा जा सकता है। पानी की आवक जारी रहने के साथ रोजाना बासनी व नागौर क्षेत्र में करीब 180 लाख लीटर पानी की आपूर्ति की जाती है। इसके अलावा प्रतिदिन सौ से डेढ़ सौ टैंकर भरे जाते हैं।
शिकायत पर करेंगे कार्रवाई
शहर में जलापूर्ति व्यवस्था सुचारू करने तथा किसी भी रूप में अवैध तरीके से टैंकर से पानी बेचे जाने की शिकायत पर कार्रवाई के लिए निर्देश दिए हैं।
जोधाराम विश्नोई, आयुक्त, नगर परिषद, नागौर
Updated on:
08 Jun 2019 06:13 pm
Published on:
08 Jun 2019 05:31 pm
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