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चुनावी दंगल में कूदे नेताओं के लिए संजीवनी साबित होंगे विवाह समारोह

-देव उठनी एकादशी पर शादियों में प्रत्याशी मांगते दिखेंगे वोट - आचार संहिता नहीं आएगी आड़े, लोगों से कर सकेंगे जनसम्पर्क- चुनाव 25 को तो 23 को देवउठनी एकादशी का अबूझ सावा

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विवाह समारोह

देव उठनी एकादशी पर होने वाले विवाह समारोह इस बार चुनावी के दंगल में कूदे नेताओं के लिए संजीवनी साबित होंगे। मतदान से दो दिन पूर्व यानी 48 घंटे पहले चुनाव प्रचार बंद हो जाएंगे पर शादी-विवाह समारोह में नेताओं की उपस्थिति इस बार रिकॉर्ड तोड़ रहने वाली होगी।

नागौर. देव उठनी एकादशी पर होने वाले विवाह समारोह इस बार चुनावी के दंगल में कूदे नेताओं के लिए संजीवनी साबित होंगे। मतदान से दो दिन पूर्व यानी 48 घंटे पहले चुनाव प्रचार बंद हो जाएंगे पर शादी-विवाह समारोह में नेताओं की उपस्थिति इस बार रिकॉर्ड तोड़ रहने वाली होगी। 23 नवंबर को देवउठनी एकादशी का अबूझ सावा है तो 25 नवंबर को विधानसभा चुनाव। ऐसे में विवाह समारोह में शामिल होकर अपने मतदाताओं को रिझाने से कौन चूकेगा। इस देवउठनी एकादशी की वजह से चुनाव की तिथि 23 के बदले 25 नवंबर की गई है।

इस दिन अबूझ सावा है, बिना किसी मुहूर्त के शादी होती है। ऐसे में शादी की संख्या भी काफी रहती है। शादी में स्थानीय नेता/जनप्रतिनिधि को बुलाने की परम्परा सी चल पड़ी है। वैसे भी अधिकांश शादी-विवाह वालों के किसी ना किसी से गहरा लगा हो जाता है। स्थानीय होते हैं, ऐसे में विवाह उत्सव सहित अन्य कार्यक्रमों में इनकी उपस्थिति लगभग तय मानी जाती है। इनके बाहर होने अथवा दूसरे किसी कार्य में व्यस्त होकर इन समारोह को टालने की कोशिश भी सामान्य सी प्रक्रिया है पर इस बार चुनाव है, ऐसे में अधिक से अधिक शादियों में शरीक होने का सौभाग्य कोई नहीं छोड़ने वाला।

असल में मतदान समाप्ति से 48 घंटे पूर्व प्रचार बंद हो जाएंगे। ना प्रत्याशी कोई सभा कर सकेगा ना ही क्षेत्र में भ्रमण कर वोट मांग सकेगा। ऐसे में इस बार देवउठनी एकादशी पर होने वाले विवाह सभी प्रत्याशियों के जनसम्पर्क का बड़ा जरिया बनेंगे। शादी-विवाह में जाने से आदर्श आचार संहिता भी आड़े नहीं आने वाली है। औसतन एक शादी में जाने पर दो-चार सौ लोगों से जनसम्पर्क तो हो ही जाएगा, दो दिन बाद होने वाले चुनाव में कोई भी प्रत्याशी किसी भी शादी को नहीं छोडऩे वाला है। शादी से पहले सगाई/लगन हो या बाद का आशीर्वाद समारोह/भोजन, मतदाताओं को रिझाने के चलते लगभग सभी प्रत्याशियों का इन दिनों रूटीन व्यस्त रहेगा।

इस तरह से हो जाएगा प्रचार भी

प्रचार बंद होने पर प्रत्याशियों के लिए शादी-विवाह सहित अन्य आयोजनों में भागीदारी बढ़ जाएगी। नाते-रिश्तेदार की शादी हो या जानकार की, हर विवाह में उपस्थिति देकर वोट बैंक मजबूत करने की बेला आने वाली है।


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