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आसक्ति से जीव भयंकर दु:खों को प्राप्त करता है

चातुर्मास के दौरान आध्यात्मिक ज्ञान-ध्यान संस्कार शिविर का आयोजन

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नागौर. जयमल जैन पौषधशाला में अखिल भारतीय श्वेतांबर स्थानकवासी जयमल जैन श्रावक संघ शाखा के तत्वाधान में चल रहे चातुर्मास के अंतर्गत समणी निर्देशिका डॉ.सुयशनिधि, समणी सुगमनिधि, समणी सुधननिधि, समणी सुयोगनिधि, समणी श्रद्धानिधि ठाणा 5 के सानिध्य में ओली आराधना तप निरंतर चल रहें है, जिसमें रविवार को दोपहर 1 से 4 बजे तक जयमल जैन आध्यात्मिक ज्ञान-ध्यान संस्कार शिविर का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सैकड़ों साधकों ने ज्ञान-ध्यान अर्जित किया व धार्मिक प्रतियोगिता में भाग लिया। श्रीपाल चरित्र का वांचन किया गया।

प्रवचन सभा को सम्बोधित करते हुए डॉ. समणी सुयशनिधि ने कहा कि स्तुति वहीं कर सकता है जो अहोभाव रखता है। स्तुति करने से साधक ज्ञान, दर्शन एवं चारित्र की प्राप्ति करते हुए शाश्वत सुखों की प्राप्ति करता है। तीन प्रकार के भाव को बताते हुए कहा कि तीर्थंकर भगवन्तों के प्रति, उनके शासन के प्रति, देव गुरु धर्म के प्रति जो भाव होते है वह है अहोभाव। संसार के सभी जीव सुखी रहे, अपने कारण से किसी को दु:ख ना पहुंचे, वह है सद्भाव। दूसरों के प्रति गलत भाव दुर्भाव कहलाता है। जिस साधक में अहोभाव प्रकट हो जाता है, वह हमेशा गुण ही देखता है। एक भक्त होता है तथा दूसरा भोगी। भोगी को परिवार, संसार अच्छा लगता है और भक्त को भगवान अच्छे लगते है।

डॉ. समणी ने कहा कि जिस तरह सबरी का झुकाव राम के प्रति था, सुदामा का कृष्ण के प्रति, गौतम स्वामी का महावीर स्वामी के प्रति, ठीक उसी प्रकार जो साधक भक्ति की उत्कृष्ट पराकाष्ठा तक पहुंच जाए तो वह पतित से पावन हो जाता है। जैन समणी सुगमनिधि ने कहा कि आसक्ति दु:खों का कारण है। आत्मा को सुख देने की ताकत विषयों में नहीं है। आसक्ति से जीव भयंकर दु:खों को प्राप्त करता है। संसार में कामवासना अग्नि जैसी ही है। अग्नि में जितना घी व लकड़ी डालो उतना ही आग बढ़ता है आत्मा का स्वरूप अवेदी निर्विकारी है।इस दौरान संजय पींचा ने बताया कि प्रवचन की प्रभावना के लाभार्थी नोरतनमल, सुरेंद्रकुमार, हेमंतकुमार सुराणा परिवार रहा तथा दर्शन प्रतिमा के लाभार्थी मदनदेवी ललवानी परिवार बैंगलोर रहा। शिविर की प्रभावना के लाभार्थी साधर्मिक महानुभव रहे। ओली तप के लाभार्थी गौतमचंद, किशोरकुमार, ललितकुमार सुराणा परिवार रहा।जे.पी.पी. अहिंसा रिसर्च फाउंडेशन की ओर से सभी आयंबिल करने वालो को प्रभावना वितरित की गई।

इस अवसर पर समणी वृंद के दर्शनों के लिए चेन्नई से भूपेश कोठारी तथा पाली, भेड़ से अनेक दर्शनार्थी पहुंचे। इस दौरान वरिष्ठ प्रतियोगिता में प्रथम-पुष्पा ललवानी, द्वितीय-ललिता छल्लानी, तृतीय-कल्पना ललवानी रहे। बच्चों की प्रतियोगिता में प्रथम-विवेक ललवानी, द्वितीय-जयेश पींचा, तृतीय-महक चौरडिय़ा रहें। सभी विजेताओं को जयमल जैन महिला मंडल द्वारा पुरस्कार प्रदान किए गए।नवीन जैन ने बताया कि प्रवचन में पूछे गए तीन प्रश्नों के उत्तर विनीता पींचा, विवेक ललवानी, सपना ललवानी ने दिए। उत्तर देने वालों को चेतनप्रकाश डूंगरवाल परिवार बैंगलोर की ओर से पांच-पांच ग्राम के चाँदी के सिक्को से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर सरोजदेवी चौरडिय़ा, शोभादेवी पारख, लीलादेवी लोढ़ा, संगीता पींचा मौजूद रहे।