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क्या जेल में ऐसा भी होता है

पत्रिका के सामाजिक सरोकार कार्यक्रम के तहत शुक्रवार को जिला मुख्यालय स्थित जेल में पतंजलि के योग गुरुओं ने कैदियों को योग सिखाया गया।

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Dharmendra Gaur

Feb 11, 2017

पत्रिका के सामाजिक सरोकार कार्यक्रम के तहत शुक्रवार को जिला मुख्यालय स्थित जेल में पतंजलि के योग गुरुओं ने कैदियों को योग सिखाया गया। अक्सर स्कूल, कॉलेज व अन्य स्थानों पर योग करवाया जाता रहा है, लेकिन पहली बार पत्रिका के सामाजिक सरोकार कार्यक्रम के तहत जेल में कैदियों को योग करवाया गया।

जेल में हर आयु वर्ग के कैदी होने के चलते उन्हें उनके हिसाब से काम आने वाले लाभदायक आसन करवाए गए। पतंजलि के कमल सोनी ने कैदियों को मंडूकासन, त्रिकोनासन, बज्रासन, वृक्षासन व भुजंगासन सहित वजन कम करने, चरबी घटाने, डायबिटिज कम करने व एकाग्रता बढ़ाने के आसन बताए।

इसके अलावा सांस-मन शुद्धि के लिए भद्रासन, अनुलोम-विलोम व उजाई प्राणायाम का अभ्यास करवाया गया। कैदियों को मूल मानव मात्र की प्राथमिकता में बताया कि किसी भी जीव की प्रथम जरूरत निरोगी काया होती है। स्वास्थ्य रहना सभी के लिए आवश्यक है वह चाहें बड़ा हो या छोटा।

कारागाह में जाने से बच सकते हैं बहुत से कैदी

योग कार्यक्रम के बाद जेलर ने कहा कि योगाभ्यास के दौरान कब घंटा बीत गया पता ही नहीं चला। कैदियों ने कहा कि योगाभ्यास के दौरान इतना समय बीतने का अहसास ही नहीं हुआ। वहीं पतंजलि के कमल सोनी ने बताया कि कैदियों के साथ योगाभ्यास करवाने के दौरान ऐसा लगा ही नहीं कि कैदियों को योग करवाया गया। कैदियों से हुई बात-चीत में पता चला कि यदि समय रहते इन्हें सही सलाह व कार्य मिल जाए तो आज कारागाह में जाने से बहुत से कैदी बच सकते हैं।