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आप बच के रहना हां, यह अस्पताल ही है

कलक्टर के आदेशों को ठेंगा : नहीं सुधरी सफाई व्यवस्था, एमसीएच में हालात जस के तस

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आप बच के रहना हां, यह अस्पताल ही है

नागौर. कलक्टर ने शनिवार को इसी टॉयलेट की सफाई के लिए कहा, लेकिन रविवार को हालात जस के तस मिले।

आप बच के रहना हां, यह अस्पताल ही है

नागौर. एमसीएच विंग में प्याऊ के पास गंदगी होने लगी तो साफ करने की बजाए प्लाई लगाकर रास्ता ही बंद कर दिया।

आप बच के रहना हां, यह अस्पताल ही है

नागौर. उखड़ी टाइलें, जगह-जगह से गिरता प्लास्टर, उखड़-खाबड़ फर्श, गंदगी से अटे कौने और दीवारें, छत से टपकता पानी एमसीएच विंग की हकीकत बन चुकी है। कहने को यह जिला मुख्यालय के जेएलएन अस्पताल का हिस्सा है, लेकिन यहां घुसते ही बदबू से सांस लेना दूभर हो जाता है। एक तो घटिया निर्माण के चलते अस्पताल भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है और ऊपर से सफाई ठेकेदार भी नियमित रूप से सफाई नहीं करवा रहा, जिससे हालात बद से बदतर हो रहे हैं।

आप बच के रहना हां, यह अस्पताल ही है

लिफ्ट में अंधेरा, सफाई भी नहीं एमसीएच विंग में गंभीर मरीजों के लिए लगाई गई लिफ्ट भी बदहाल स्थिति में है। न तो कभी लिफ्ट की सफाई होती है और न ही मरम्मत। मरीजों का कहना है कि लिफ्ट में लाइट काफी समय से बंद है, इसलिए अंदर जाने से डर लगता है।

आप बच के रहना हां, यह अस्पताल ही है

नागौर. लेबर रूम के दरवाजे के सामने हर वक्त पानी टपकता है, ठीक करने की बजाए फर्श पर एक बर्तन रख दिया, जिसके ठोकर लगने से पानी फर्श पर गिरता रहता है।

आप बच के रहना हां, यह अस्पताल ही है

एमसीएच भवन के हालात देखकर लगता नहीं है कि यह अस्पताल है, लेकिन हकीकत यही है कि यह अस्पताल ही है। जिला कलक्टर पीयूष समारिया ने शनिवार को निरीक्षण के दौरान मिली गंदगी व अव्यवस्था को लेकर पीएमओ तथा ठेकेदार को सफाई के निर्देश दिए, लेकिन रविवार को स्थिति में सुधार नहीं आया।

आप बच के रहना हां, यह अस्पताल ही है

पत्रिका ने कैमरे की नजर डाली तो हालात जस के तस मिले। ठेकेदार ने कलक्टर के निर्देशों को एक कान से सुनकर दूसरे से निकाल दिया।

आप बच के रहना हां, यह अस्पताल ही है

कैसे ठीक होंगे मरीज मरीज अस्पताल में उपचार लेने के लिए आता है, ताकि स्वस्थ हो जाए पर यहां पसरी गंदगी और बदबू से मरीजों के परिजन भी बीमार हो रहे हैं। अस्पताल के लेबर रूम के आगे 24 घंटे छत से पानी टपकता रहता है। उसको बंद करने की बजाए गेट के आगे एक बर्तन रख दिया है, जिसके आते-जाते स्टाफ व मरीजों की ठोकर लगती है तो पानी फर्श पर बिखर जाता है। सफेद टाइल होने से पानी दिखाई भी नहीं देता है और हर वक्त फिसलने का डर रहता है।