
उन्हेल. नगर के लिए शुक्रवार का दिन आध्यात्मिक दृष्टि से ऐतिहासिक बन गया। विगत सात दिनों से चल रही श्रीमद्भागवत कथा का विश्राम श्रद्धा, भक्ति और भावनाओं के सागर में डूबे वातावरण के बीच संपन्न हुआ। कथा विश्राम के अवसर पर भव्य शोभायात्रा और महाप्रसादी का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर धर्मलाभ अर्जित किया।श्रीमद्भागवत कथा समिति के तत्वावधान में आयोजित इस कथा का वाचन वृंदावनवासी सुप्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय कथावाचक परम पूज्य श्री गोरांगी गौरी महाराज द्वारा किया गया। कथा पांडाल में उपस्थित प्रत्येक श्रोता कथा विश्राम के समय भावुक नजर आया। महाराज श्री ने द्वारिकालिला महोत्सव, सुदामा पूजन और भागवत धर्म के गूढ़ प्रसंगों का वर्णन करते हुए कहा कि भागवत कथा इतनी दिव्य है कि सात दिन नहीं, सात हजार दिन भी इसका श्रवण किया जाए तो भी कम है। उन्होंने कहा कि भगवान की कृपा निरंतर हम पर बरसती है, लेकिन माया के पर्दे के कारण वह हमें दिखाई नहीं देती।
प्रवचन के दौरान गोरांगी गौरी महाराज ने कहा कि मनुष्य अपनी इंद्रियों का दास बन चुका है और इंद्रियों के गुलाम का भविष्य कभी उज्ज्वल नहीं हो सकता। भागवत कथा ही हमें इंद्रियों का स्वामी बनना सिखाती है। उन्होंने बताया कि जब मूर्ति में भाव का निवेदन किया जाता है, तब उसमें देवत्व प्रकट हो जाता है। प्रेम नियमों से ऊपर उठाता है और ठाकुर जी से सच्चा प्रेम मनुष्य को सर्वोच्च स्तर तक पहुंचा देता है। कृष्ण-सुदामा की मित्रता का अत्यंत मार्मिक चित्रण सुनकर कथा पांडाल श्रद्धा और करुणा से भर उठा।
कथा विश्राम के उपरांत नगर में भव्य शोभायात्रा निकाली गई और महाप्रसादी का आयोजन हुआ। इस अवसर पर विभिन्न महिला मंडलों मां भवानी, भोलेनाथ, श्रीराम मंदिर, मां कालिका माता, शीतलामाता, पंचमुखी हनुमान, मनकामनेश्वर, राधाकृष्ण मालवीय मंदिर, राधे-राधे, भेरु महाराज और साईंनाथ महिला मंडल द्वारा भंडारे और शोभायात्रा में सक्रिय सेवाएं दी गईं। महाराज श्री ने कहा कि सनातन धर्म में अन्न को ब्रह्म माना गया है और जैन समाज की प्रशंसा करते हुए बताया कि वे अन्न का एक दाना भी व्यर्थ नहीं जाने देते। अंत में उन्होंने कहा जो यश के पीछे भागता है, उसे भगवान का रस नहीं मिलता, और जो भगवान के रस के पीछे चलता है, उसे अपार यश स्वतः प्राप्त होता है।
Updated on:
30 Jan 2026, 11:11 PM IST
Published on:
30 Jan 2026, 11:10 PM IST
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