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नवीन कृषि उपज मंडी निर्माण में देरी

जमीन के प्रकाशन को लेकर मामला अटका

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नागदा

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Lalit Saxena

Mar 05, 2018

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नागदा. नवीन कृषि उपज मंडी निर्माण कार्य में विभागों के बीच फाइल अटक गई है। नवीन मंडी निर्माण में अब एक और समस्या उत्पन्न हो गई। कलेक्टर ने नवीन मंडी की भूमि का प्रकाशन नहीं किया, जिसके चलते उक्त फाइल को मप्र शासन ने पुन: मंडी बोर्ड को भेज दी है। जिसे अब संयुक्त संचालक कलेक्टर के पास लेकर जाएंगे, हालांकि कलेक्टर ने तर्क दिया है कि तकनीकी स्वीकृति की आवश्यकता नहीं है। विभागों के बीच हो रही कागजी कार्रवाई में लेटलतीफी से किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
क्यों अटका मामला : स्थानीय मंडी प्रबंधन ने नवीन मंडी के नागदा से बाहर महिदपुर रोड पर जमीन अधिग्रहण की है। मंडी बोर्ड ने जमीन का मुआवजा भी संबधित किसानों को वितरण कर दिया। मंडी बोर्ड ने नवीन मंडी के लिए स्थानीय मंडी प्रबंधन को 1 करोड़ 40 लाख रु की राशि भी स्वीकृत कर दी, जिससे कुछ निर्माण कार्य होगा। इसकी डीपीआर भी तैयार कर ली गई। शेष राशि के लिए मप्र शासन ने तकनीकी स्वीकृति नहीं होने से मामला रोक दिया। शासन का कहना है कि नवीन मंडी की जमीन का प्रकाशन किया जाए। यह प्रकाशन कलेक्टर द्वारा होता है। प्रकाशन के स्थानीय मंडी प्रबंधन ने कलेक्टर के समक्ष पहुंचा था, लेकिन कलेक्टर ने यह कह कर मंडी प्रबंधन को लौटा दिया कि इस में प्रकाशन की आवश्यकता नहीं है।
1 करोड़ ४० लाख ८४ हजार स्वीकृत
मंडी बोर्ड ने नवीन मंडी के लिए 1 करोड़ ४० लाख ८४ हजार स्वीकृत किए है। इस राशि से मंडी की बाउंड्रीवॉल, प्रवेश व निकलने के 2 गेट, चेक पोस्ट का निर्माण किया जाएगा। बाउंड्रीवॉल की लंबाई लगभग १७३ मीटर होगी, जबकि चौड़ाई ३८५ फीट होगी। जबकि विधायक दिलीपसिंह शेखावत ने मप्र सरकार को नवीन निर्माण के लिए लगभग 8 करोडकी राशि स्वीकृत करने का पत्र भी लिखा था।
५.१५३ हेक्टेयर भूमि पर बनना है मंडी
नवीन कृषि उपज मंडी शहर से लगभग दो किमी दूर महिदपुर रोड पर पुराने ट्रैंचिंग ग्राउड के समीप बनेगी। यहां पर प्रशासन ने ५.१५३ हेक्टेयर (लगभग २६ बीघा) जमीन अधिगृहीत की है, जो पाड़ल्या हल्का क्षेत्र में आती है। मंडी प्रबंधन ने नवीन मंडी के लिए 8 किसानों से उक्त जमीन अधिगृहीत की है। किसानों को मुआवाजे के रूप में लगभग 4 करोड़ ०३ लाख रुपए दिए गए हैं। इनमें कुछ राशि लगभग ३ करोड ५० लाख रुपए मंडी बोर्ड ने स्थानीय मंडी प्रबंधन को लोन के रूप में दी है। शेष राशि मंडी के पास थी। मंडी प्रबंधन ने नवीन मंडी के लिए 32 लाख की लागत से जमीन की रजिस्ट्री कराई।
3 वर्ष पूर्व हुई थी घोषणा
शहर में नवीन मंडी मांग गत 10 वर्ष से उठ रही है । वर्ष २०१३ में भी स्थानीय मंडी बोर्डने जमीन चिन्हित कर प्रस्ताव बनाकर मप्र सरकार व मंडी बोर्ड भेजा था और लोन की मांग की थी। लेकिन मंडी बोर्ड भोपाल ने स्थानीय मंडी प्रबंधन को 6 करोड़ का लोन देने से इनकार कर दिया। जिसके चलते स्थानीय राजस्व विभाग ने जुलाई २०१३ में प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। जिसके बाद मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने २५ अप्रैल २०१५ को गांव बुरानाबाद में जवाहर नवोदय विद्यालय के लोकार्पण में शहर में नवीन मंडी की घोषणा की थी। जिसके बाद मंडी प्रबंधन ने जमीन खरीदी। जिसके बाद जुलाई माह में भूमि अधिग्रहण कर १३ जुलाई को रजिस्ट्री करा ली ।
नवीन मंडी के निर्माण को लेकर कलेक्टर द्वारा प्रकाशन व तकनीकी स्वीकृति के चलते देरी हो रही है। जल्द ही मंडी का कार्य शुरू होगा।
नागेंद्रसिंह राठौर, सहायक उपनिरीक्षक, कृषि उपज मंडी, नागदा