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बंदर का आतंक: महिला को किया गंभीर घायल, आईसीयू में भर्ती

रुनीजा और माधवपुरा के ग्रामीणों में भय, घरों से बाहर निकलने में डर रहे

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Monkey terror: Woman seriously injured, admitted in ICU

रुनीजा और माधवपुरा के ग्रामीणों में भय, घरों से बाहर निकलने में डर रहे

रुनीजा. रुनीजा और माधवपुरा क्षेत्र में हमलावर बंदर का आतंक दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। प्रतिदिन किसी न किसी व्यक्ति पर हमला कर घायल कर रहा है। लोगों में उक्त बंदर को लेकर भय का वातावरण तथा लोग घर के बाहर निकलने में भी डरने लगे हैं। सोमवार को उक्त बंदर ने 20 वर्षीय रुनीजा निवासी रोहित पिता सत्यनारायण यादव को पांव में काटा था। मंगलवार को फिर से रुनीजा में 80 वर्षीय प्रतापकुंवर पति प्रतापतसिंह शक्तावत जो अपने घर के बाहर बैठी थी। अचानक ही बंदर आया और उनके हाथ को कई जगह काटकर बुरी तरह जख्मी कर दिया। घायल प्रतापकुंवर को रुनीजा निजी अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने मना कर दिया। बडऩगर में भी डॉक्टरों के मना करने के बाद गंभीर अवस्था में रतलाम निजी नर्सिंग होम में आईसीयू में भर्ती कराया है, जहां उनकी हालत गंभीर बताई जा रही हैं और बताया जा रहा है कि उनके हाथ का ऑपरेशन होगा। प्रतापकुंवर के घायल होने की जानकारी जैसे ही लोगों को मिली लोगों में बंदर को लेकर और भय बढ़ गया। चारों ओर से इस बंदर को पकडऩे की मांग उठ रही है। किसी भी तरह से यदि उस बंदर को नहीं पकड़ा तो वह किसी भी दिन गंभीर हादसा हो सकता है।
अब तक १०-१५ लोगों को कर चुका घायल
अभी तक बंदर के हमले से १०-१५ ग्रामीण घायल हो चुके है। जिसमें राजेन्द्र पिता हीरालाल पांचाल, नीता पति दिनेश जकड़ा, कन्हैया पिता बाबूलाल सोलंकी, रामकुंवर बाई पति शंकरलाल, उमा कुंवर चिमनसिंह राठौर, लीलाबाई इंदरमल चौहान, दुर्गा पति जितेंद्र माली, रोहित पिता सत्यनारायण यादव, प्रताप कुंवर पति प्रताप सिंह शक्तावत, तुलसी कन्हैयालाल ये सभी घायल रुनीजा के ही है।
दूसरे बंदर को पकड़कर ले गई वनविभाग की टीम
पंचायत सचिव राजेन्द्र भाबोर व सरपंच ज्योति मईड़ा ने बताया वन विभाग की टीम को फोन किया था तब वो दूसरे बंदर को पकड़ गए थे। डॉ. महेश डोडिया ने बताया यह बंदर अभीतक 10-15 लोगों को काटकर घायल कर चुका है। यदि इसे समय रहते नहीं पकड़ा तो कभी कोई बड़ी अनहोनी भी हो सकती है।
बंदर को कलर से रंगों ताकि पकड़ सके
१५ नवंबर को हमलावर बंदर ने एक बालक को काटकर घायल कर दिया था। इस दौरान ग्रामीणों ने बंदर को पकडऩे की मांग की थी। दिनेश जकड़ा ने वन विभाग के अधिकारी को सूचना देकर बंदर को पकडऩे का कहा था। संबंधित अधिकारी का कहना था कि बंदर को कलर से रंगों, ताकि टीम पकडऩे आए तो हमलावर बंदर की पहचान हो सके। अधिकारी के इस जवाब से ग्रामीण सकते में आ गए कि इस बंदर को पकडऩे की हिम्मत कौन करे।
इनका कहना
पिछले दिनों बंदर को पकडऩे टीम गई थी, लेकिन दूसरे बंदर को पकड़कर ले आई। हमलावर बंदर मौके पर नहीं मिलता है। ग्रामीणों को बंदर पर निगरानी के लिए कहा है। बुधवार को टीम को भेजकर बंदर का रेस्क्यू किया जाएगा।
संजय तिवारी, वन विभाग बडऩगर