जगोटी पत्रिका. क्षेत्र में पहली बार पाड़ों की लड़ाई हुई, जिसे देखने सैकड़ों लोग मौजूद रहे। सोमवार को जगोटी से करीब तीन किलोमीटर दूर मालीखेड़ी मार्ग पर खुरचेनिया चंद्रभान के पास मां शारदा वेयर हाउस में मंगल और रामा नाम के दो पाड़ों के बीच रोमांचक लड़ाई हुई, जो कुछ मिनटों तक ही चली, जिसमें मंगल को हराकर रामा विजयी हुआ।
ग्राम सुल्तानिया सहित अंचल में ग्रामीण निभा रहे गाय और छोड़ा उत्सव की पुरातन परंपरा
सारंगपुर. ग्रामीण क्षेत्रों में दीपावली के दूसरे दिन पड़वा पर गाय पूजन के बाद सदियों से चली आ रही परंपरा को ग्रामीण निभा रहे हैं। इसी के तहत राजगढ़ जिले के सुल्तानिया में भी तमिलनाडु के जलीकट्टू की तर्ज पर गौ क्रीड़ा जिसे (छोड़ा) कहते हैं, ग्रामीण पुरानी परंपरा का निवर्हन करते हुए युवाजन से लेकर बुजुर्ग तक गांव के सभी लोग लकड़ी के डंडे में तुलसी की प्रजाति के पौधें के ग_र पाड़े के ताजे चमड़े में रस्सी के सहारे बांधकर गाय के पास लेकर जाते हैं। इससे गाय उसमें तेजी से प्रहार कर मारती है। यह क्रिया बार-बार दोहराई जाती है। बुजुर्ग बंसीलाल पटेल बताते हैं कि चमड़ा अपवित्र होता हैं। जब इसे गाय के पास लेकर जाते हैं तो वह उसे सींग मारकर दूर करती है। यह छोड़ा उत्सव बताते हैं कि भगवान देवनारायण के द्वारा यह खेल शुरू किया गया था। जिसे आज भी पीढ़ी-दर-पीढ़ी धार्मिक सद्भावना व भाईचारे के साथ ग्रामीण मनाते हैं। यह खेल जोखिम भरा है, लेकिन ग्रामीण इसे आस्था व गांव की सुख-शांति-समृद्धि का प्रतीक मानते हैं। कई बार परंपरा को करने के दौरान लोगों को गायों ने रौंद दिया, जिससे चोटिल भी हुए हैं लेकिन यह छोड़ा खेल परंपरा को छोड़ नहीं रहे हैं