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जन्मदिन विशेष:रविंद्र नाथ टैगोर का छत्तीसगढ़ से है दर्द का रिश्ता

रवींद्रनाथ टैगोर (Rabindranath Tagore)ने अपने आधुनिक विचारों, कविताओं और राष्ट्रवाद पर विचारों के जरिए एक नई लकीर खिंच दी।

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Rabindranath Tagore

जन्मदिन विशेष:रविंद्र नाथ टैगोर का छत्तीसगढ़ से है दर्द का रिश्ता

बिलासपुर. साहित्य जगत के लिए आज का दिन बहुत विशेष है।आज ही के दिन (7 MAY) को रबीन्द्रनाथ टैगोर (Rabindranath Tagore) का जन्म कलकत्ता के एक संपन्न परिवार में हुआ था।गांधी जी ने जहां अपने सत्य और अहिंसा के सार्वभौम मूल्यों के जरिए दुनिया के तमाम नेताओं और लोगों को प्रभावित किया और भारत को आजादी भी दिलाई तो वहीं रवींद्रनाथ टैगोर ने अपने आधुनिक विचारों, कविताओं और राष्ट्रवाद पर विचारों के जरिए एक नई लकीर खिंच दी।

उन्हें एक कवि, लघु कथा लेखक, संगीतकार, चित्रकार, गीतकार, नाटककार के तौर पर इतिहास में एक युग पुरुष का दर्जा भी मिला हुआ है।

1913 में उन्हें उनकी कृति गीतांजली के लिए साहित्य श्रेणी में सबसे बड़े पुरस्कार नोबल प्राइज से नवाजा गया।उनकी उपलब्धि इस मायने में भी बड़ी हो जाती है की टैगोर एशिया के पहले ऐसे व्यक्ति हैं , जिन्हें नोबेल पुरस्कार मिला। ऐसा कहा जाता है कि नोबल पुरस्कार उन्होंने सीधे स्वीकार नहीं किया था। उनकी ओर से ब्रिटेन के राजदूत ने पुरस्कार लिया था और फिर उन्हें दिया था।

टैगोर का छत्तीसगढ़ से रिश्ता

रवीन्द्रनाथ टैगोर और छत्तीसगढ़ का रिश्ता दर्द का है। टैगोर यहाँ तब आये थे जब उनकी पत्नी क्षय रोग (टीबी) से पीड़ित थी। पेंड्रा रोड स्थित टीबी सैनिटोरियम में इलाज कराने के लिए आये थे और उसी दौरान उन्होंने कुछ वक़्त यहाँ गुजारा था। यात्रा के दौरान बिलासपुर रेलवे स्टेशन पर उन्होंने एक कविता भी लिखी थी। कविता का शीर्षक था ‘फांकी‘ जिसे आज भी बिलासपुर के स्टेशन पर पढ़ा जा सकता है।

रविंद्र नाथ की पांच सर्वश्रेष्ठ कवितायें

1-हो चित्त जहाँ भय-शून्य, माथ हो उन्नत

2-धीरे चलो, धीरे बंधु

3-सोने के पिंजरे में नहीं रहे दिन

4-यह कौन विरहणी आती

5-चीन्हूँ मैं चीन्हूँ तुम्हें ओ, विदेशिनी !