जिला मुयालय में शरण लिए नक्सली पीड़ित परिवार के 14 वर्षीय बालक ने बताया कि छोटे बच्चों को स्कूल में पीटी करने के साथ पढ़ाई करवाई जाती थी, लेकिन बड़े बच्चों को अलग स्कूल में बंदूक चलाने सहित जंगल टेक्टिस का प्रशिक्षण दिया जाता था। इसमें बड़े बच्चों को सुबह जंगल टेक्टिस में आर्मी जैसा प्रशिक्षण देकर अपने लिए लाल लड़ाके तैयार करने का कार्य किया जा रहा था।