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मच्छरों को मारने हर साल 2 करोड़ की जलाते हैं क्वाइल, पढि़ए एक जिले की ये रिपोर्ट

इस प्रकार जाने-अनजाने मेंं प्रतिदिन इसका धुआं अपने फेंफड़े में भर रहे हैं।

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CG News

मच्छरों को मारने हर साल 2 करोड़ की जलाते हैं क्वाइल, पढि़ए एक जिले की ये रिपोर्ट

धमतरी. दिन और रात का तापमान बढ़ते ही गर्मी का अहसास भी होने लगा है। इसके साथ ही मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ गया है। बाजार में ब्रांडेड कंपनी के मच्छर क्वाइल की डिमांड भी बढ़ गई है। एक जानकारी के अनुसार हर साल यहां करीब 2 करोड़ रूपए की क्वाइल और लिक्विड की बिक्री होती है।

वातावरण में नमी आने के साथ ही शहर में सफाई व्यवस्था का ढांचा चरमाने से मच्छर का प्रकोप बढ़ गया है। एक जानकारी के अनुसार पिछले साल की तुलना में इस साल शहर मेंं बड़ी तादाद में मच्छर ज्यादा पैदा हो रहे हैं। ऐसे मेंं इससे बचने के लिए लोग विभिन्न ब्रांडेड कंपनियों के क्वाईल और अगरबती का उपयोग कर रहे हैं। एक दुकानदार ने बताया कि प्रतिदिन धमतरी जिले मेंं ही करीब 5 लाख रुपए से अधिक का मच्छर अगरबत्ती और क्वाइल की खपत हो जाती है। विशषज्ञों की मानें तो मॉसकिटो क्वाइल को बनाने के लिए पोटेशियम नाइटे्रट, सोडियम बेंजोएट, एकाइल एराइल सल्फोनेट, पॉलीआक्सी इथी्रलिन इथर ब्लैड समेत विभिन्न प्रकार के जहरीले तत्वों का इस्तेमाल किया जाता है, जो शरीर के लिए घातक है।

सेहत डांवाडोल
एक जानकारी के अनुसार एक मॉसकिटो क्वाइल जलाने पर करीब दो पैकेट सिगरेट के बराबर धुआं निकलता है। अक्सर देखा गया है कि मच्छर से बचने के लिए व्यक्ति रात में सोने से पहले क्वाइल जला लेता है। इस प्रकार जाने-अनजाने मेंं प्रतिदिन इसका धुआं अपने फेंफड़े में भर रहे हैं। इस तरह क्वाइल से सेहत भी डांवाडोल हो रही है।

नियम की अनदेखी
***** सेल व्यापारी रमेश आहुजा ने बताया कि मॉसकिटो क्वाइल के डिब्बे में स्पष्ट दिशा-निर्देश दिया रहता है। सोने के करीब आधा घंटा पहले मॉसकिटो क्वाइल जलाकर कमरे को बंद करना चाहिए। इसके बाद खिड़की-दरवाजों को कम से कम 15 मिनट खोल देना चाहिए, लेकिन इस विधि का 90 प्रतिशत लोग उपयोग नहीं करते। उधर, नगर निगम प्रशासन की ओर से भी मच्छर के उन्मूलन के लिए फागिंग मशीन का उपयोग नहीं किया जा रहा। पार्षदों का कहना है कि इस एवज में लाखों रुपए का बजट रखा जाता है।