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अबूझमाड़ में स्थित है कठिन यात्रा वाले भोले नाथ का द्वार, 35 किमी रास्ता पैदल ही तय कर पहुंचते हैं श्रद्धालु

Tular Cave Abujhmad: बाणासुर राजा के समय तुलार गुफा के ऊपर एक विशाल तालाब हुआ करता था जो आज भी अद्भुत व अद्रश्य है। चट्टानवाले तुलार गुफा की खासियत यह है कि जिस जगह पर शिवलिंग स्थापित हैं, वहां पर गुफा के ऊपरी हिस्से से पानी लगातार रिसता रहता है।

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 तुलार गुफा

तुलार गुफा

Tular Cave Abujhmad: अबूझमाड़ के इलाके में स्थित है तुलार गुफा में इस बार भी महाशिवरात्रि पर हजारों श्रद्धालुओं पहुंचे और भगवान शिव का जलाभिषेक किया। सरकारी रिकार्ड व राजस्व के मुताबिक बीजापुर जिले के भैरमगढ़ ब्लॉक अंतर्गत यह जगह तुलार घाम तोड़मा में स्थित है।

अधिकांश लोग बारसूर से तुलार गुफा (Tular Cave Abujhmad) तक 35 किमी लंबा रास्ता पैदल ही तय कर यहां पहुंच रहे हैं। पथरीली खड़ी चढ़ाई व पगड्डी वाली पहाड़ियों से होकर गुजरने में लोगों को काफी कष्ट उठाना पड़ता है। पर्व के लिए इक्का-दुक्का अस्थाई दुकानें भी लगी रहती हैं। कोशलनार व सातधार मंगनार घाट से इंद्रावती नदी पार करने के बाद यहां पहुंचा जा सकता है।

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नक्सली दहशत हावी हुई
ग्रामीणों में तुलार धाम के नाम से विख्यात गुफा(Tular Cave Abujhmad) पर बीते एक दशक से नक्सली दहशत हावी है। तीन साल पहले नक्सलियों ने इस जगह पर गुफा के ठीक सामने गुंडाधूर स्मारक का निर्माण भी किया हुआ है, जिसे देखते ही यहां पहुंचने वाले लोग एक बार ही दहशत से सिहर उठते हैं। दहशत के चलते सड़क की मरम्मत बीते 15 साल से नहीं हुई। बाइक सायकिल पर लोग बड़ी मुश्किल से यहां पहुंच पाते हैं।

बारसूर के नजदीक से इंद्रावती नदी पार करने के बाद , कोसलनार, मंगनार, गुफा बुड़दुम,तोड़मा गांव होते हुए यहां पहुंचा जा सकता है। सातधार से मंगनार तक कच्ची सड़क भी है, लेकिन आगे का रास्ता ज्यादा खराब है। जंगली इलाके में पैदल सफर तय करने में 4 घंटे से ज्यादा वक्त लग जाता है।

शिवलिंग के ऊपर रिसता है पानी
जानकारों के मुताबिक, बाणासुर राजा के समय तुलार गुफा के ऊपर एक विशाल तालाब हुआ करता था जो आज भी अद्भुत व अद्रश्य है। चट्टानवाले तुलार गुफा(Tular Cave Abujhmad) की खासियत यह है कि जिस जगह पर शिवलिंग स्थापित हैं, वहां पर गुफा के ऊपरी हिस्से से पानी लगातार रिसता रहता है।

चंद्रमा की स्थिति के अनुसार पानी की मात्रा घटती-बढ़ती रहती है। माघ पूर्णिमा में पानी ज्यादा वेग से रिसता है, जबकि महा शिवरात्रि में वेग कम रहता है। रिसने वाले पानी के स्रोत की पड़ताल करने की कोशिश कई बार गई, लेकिन पता नहीं चला। इसी पानी से श्रद्धालु स्नान अभिषेक करते हैं, और लौटते वक्त गंगाजल की तरह अपने साथ बोतलों में भरकर पानी ले जाते हैं। श्रद्धालुओं के मुताबिक बाणासुर की साधना स्थली के रूप में भी यह स्थान(Tular Cave Abujhmad) मशहूर है।