
एमपी में 111 साल पुराना गुरुकुल, हॉलैंड और मॉरीशस में छात्रों की धाक
नर्मदापुरम. मध्यप्रदेश में एक ऐसा भी गुरुकुल है, जो 111 साल पुराना है, इस गुरुकुल के शिष्य देश ही नहीं बल्कि विदेश में भी धर्म, संस्कृति और वैदिक मंत्रों का ज्ञान फैला रहे हैं, गुरुकुल के शिष्य करीब २४ देशों में संस्कृत का प्रचार कर रहे हैं, यहां आने वाले शिष्यों को कक्षा छठी से प्रवेश मिल जाता है और एमए तक उनकी पढ़ाई होती है।
गुरुकुल की प्राचीन शिक्षा व्यवस्था को न केवल नर्मदापुरम में जीवित रखा गया है, बल्कि वैदिक शिक्षा का उजियारा विदेश तक में फैल चुका है। नर्मदापुरम के आर्ष गुरुकुल में पढ़ने वाले चार छात्र ओमप्रकाश सांवेदी, विजय प्रकाश हॉलैंड और अनिल बद्री व संजय छेदी मॉरीशस में वेद, योग और धर्म की शिक्षा दे रहे हैं। गुरुकुल के 19 वर्षीय छात्र मोहन आर्य और आचार्य जगददेव नैष्टिक जून 2022 में 22 दिन की विदेश यात्रा (मॉरीशस) से लौटे हैं। उन्होंने बताया कि मॉरीशस में गुरुकुल के माध्यम से लोगों को भारतीय संस्कृतिक, वैदिक विज्ञान और धर्म की शिक्षा दी गई। गुरुकुल के आचार्य जगददेव नैष्टिक 14 बार विदेश में धर्म प्रचार कर चुके हैं।
मध्यप्रदेश में 4 गुरुकुल शाजापुर, खंडवा, भोपाल और नर्मदापुरम में हैं। आर्ष गुरुकुल समिति के सचिव आचार्य योगेंद्र याज्ञिक बताते हैं कि सबसे प्राचीन आर्ष गुरुकुल नर्मदापुरम का है। इसकी स्थापना 27 अप्रेल 1912 को हुई थी। गुरुकुल अपने 111 वर्ष पूर्ण करने जा रहा है।
24 देशों में संस्कृत का प्रचार कर रहे शिष्य
शिक्षा पद्धति ऐसी
-प्रवेश परीक्षा से देशभर के किसी भी जाति वर्ग के छात्र को कक्षा छठवीं में प्रवेश दिया जाता है।
-8वीं तक की पढ़ाई प्रथमा, 12वीं तक मध्यमा, बीए की पढ़ाई शास्त्री और एमए तक की पढ़ाई आचार्य होती है।
-गुरुकुल से अब तक निकले 250 से अधिक छात्र देश-विदेश में शासन-प्रशासन के उच्च पदों पर पदस्थ हैं।
सचिव आचार्य योगेंद्र याज्ञिक ने बताया कि 22 बटुकों से शुरू हुए गुरुकुल से हर साल 100 से ज्यादा शिष्य पढ़ाई पूरी करके निकलते हैं। इसी गुरुकुल में चंद्रशेखर आजाद ने क्रांतिकारी आंदोलन के दौरान समय-समय पर अज्ञातवास काटा था। यहां बटुक संस्कृत, वेदपाठ सहित कंप्यूटर और नए विषयों की पढ़ाई के साथ खेती, मलखंब जैसी शारीरिक गतिविधियां करते हैं। यहां तक कि गोपालन, गुरु की सेवा और पाककला सीखते हैं। यहां से निकले बटुक 24 देशों में अध्ययन अध्यापन से जुड़कर अलख जगा रहे हैं। इस वर्ष 27 अप्रेल को गुरुकुल अपनी स्थापना के 111 वर्ष पूर्ण करने जा रहा है।
Published on:
12 Feb 2023 03:51 pm
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