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मौत के सुराख, फर्श पर पत्थर रख छुपा रहे, घिसे टायरों पर दौड़ रहीं बसें

बसों फर्श इतने खराब हो चुके कि इनमें कई जगह सुराख, ***** और टीन चद्दरें उखड़ी हुई थी। टायर घिसे हुए पुराने रिमोल्ड पाए गए। एक घंटे तक स्टैंड पर खड़ी बसों को अंदर बाहर से देखा गया तो यात्रियों की सुरक्षा कम खतरनाक जानलेवा स्थिति ज्यादा नजर आईं।

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मौत के सुराख, फर्श पर पत्थर रख छुपा रहे, घिसे टायरों पर दौड़ रहीं बसें

मौत के सुराख, फर्श पर पत्थर रख छुपा रहे, घिसे टायरों पर दौड़ रहीं बसें

नर्मदापुरम. जिले में दौड़ रही बसों का भगवान ही मालिक है। संभागीय स्टैंड पर बुधवार शाम को पत्रिका टीम ने पड़ताल की परिवहन विभाग के नियम-निर्देशों पर अमल नजर आया। बसों फर्श इतने खराब हो चुके कि इनमें कई जगह सुराख, ***** और टीन चद्दरें उखड़ी हुई थी। टायर घिसे हुए पुराने रिमोल्ड पाए गए। एक घंटे तक स्टैंड पर खड़ी बसों को अंदर बाहर से देखा गया तो यात्रियों की सुरक्षा कम खतरनाक जानलेवा स्थिति ज्यादा नजर आईं। बसों में भीषण गर्मी के बीच भी तय क्षमता से ज्यादा सवारियां बैठाने का दौर नहीं थमा था। 40 डिग्री पारे के बीच बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों तक को खड़े होकर सफर करते हुए बेबस-मजबूर पाया गया। सवाल ये है कि जिले एवं जिले से बाहर हाइवे व मुख्य मार्गों पर जो कंडम-खटारा बसें अंधी रफ्तार से दौड़ रही है, उस पर परिवहन विभाग आखिर नियंत्रण क्यों नहीं लगा पा रहा है। प्रदेश के साथ ही नर्मदापुरम जिले में लगातार बस के पलटने, दुर्घटनाग्रस्त होने का सिलसिला जारी है। विभाग का फ्लाइंग स्क्वॉड चेकिंग के नाम पर सिर्फ चालानी कार्रवाईयों तक ही सीमित होकर रह गया है।

हाथ छोड़कर चला रहे थे बस

एक बस तो ऐसी दिखी जिसका ड्राइवर बिना स्टीयरिंग पकड़े बस को चला रहा था। उसे पीछे बैठी सवारियों की भी कोई चिंता नहीं थी। सवारियां भीषण तपन के बीच पसीना पोंछते हुए भगवान भरोसे अपना सफर करते हुए नजर आईं। हालत यह थी कि बस के आगे पीछे के गेट की सीडिय़ों के ऊपर से टीन उखड़े हुए थे। चढ़ते-उतरते सवारियां ठोकर खा रहीं थी। कई जगह से फर्श पर सुराग-होल भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे थे।