
संदीप नायक/ नर्मदापुरम। प्रदेश के हिल स्टेशन के रूप में पहचान रखने वाले पचमढ़ी का शहद देशभर में प्रसिद्ब है। इसका कारण यहां के जंगलों में भरपूर जड़ी-बूटियां होना है। यहां की 99 प्रतिशत शहद पहाड़ों और गुफाओं में उत्पादित होती है। अयुर्वेद का काम करने वाले पचमढ़ी के विवेक बताते हैं कि इस तरह की शहद तुर्की और चीन में होता है। जिसकी कीमत लाखों में होती है। यदि पचमढ़ी में गुणवत्ता और प्रचार-प्रसार पर जोर दिया जाए तो यहां शहद के कारोबार का भविष्य अच्छा है। यहां सालभर में करीब 2 लाख किलो शहद की बिक्री होती है। मतलब हर दिन करीब 500 किलो तक शहद बिकता है। पचमढ़ी के जंगलों में मिलने वाला शहद औषधीय गुणों के कारण स्वास्थ्य वर्धक होता है। दरअसल आदिवासी जंगल से इसे लेकर पचमढ़ी लाते हैं। इसे वन समितियों और स्थानीय दुकानदारों को उपलब्ध कराते हैं। इसके अलावा वन समितियां भी स्थानीय दुकानों पर बेचती हैं।
600-700 रुपए प्रति किलो तक बिकता
यहां बिकने वाले शहद की कीमत 600-7000 रुपए प्रति किलो तक रहती है। जैसे-जैसे यह पुराना होता जाता है इसकी गुणवत्ता बढ़ती जाती है। इसका उपयोग अलग-अलग कार्यों के लिए किया जाता है। मटकुली, छिंदवाड़ा और पिपरिया के जंगलों में उत्पादित होने वाला शहद भी पचमढ़ी में लाकर बेचा जाता है।
शहद खरा होने की पहचान
शहर बिक्रेता बताते हैं कि आमतौर पर शहर मीठी होती है, लेकिन पचमढ़ी की शहद में हल्का कड़वापन होता है। फ्रिज में रखने पर यह इसमें दाने नहीं आते जबकि अन्य शहद में दाने हो जाते हैं।
इनका कहना
तीसरी पीढ़ी कर रही कारोबार
हमारी तीसरी पीढ़ी शहद बेचने का काम कर रही है। हम सालभर में करीब 1500 किलो शहद बेचते हैं। पचमढ़ी पहुंचने पहुंचने वालेे लगभग हर पर्यटक अपने साथ शहद ले जाता है।
नीलेश जैन, जैन आयुर्वेद सेंटर, पचमढ़ी
यहां के जंगलों में सामान्य फूल नहीं होतेे हैं। औषधीय पौधों के कारण इसका उपयोग दवा के रूप करते हैं। आने वाले पर्यटकों को सही और गुणवत्ता वाला शहद मिले इसके लिए दुकानों पर लगातार चैकिंग होनी चाहिए।
विवेक कुमार, ओम सांई आयुर्वेद उद्योग
मरीजों को दवा के रूप में देते हैं
करीब 35 साल से नाड़ी देखकर लोगों का इलाज कर रहे हैं। मरीजों को दवा के रूप में शहद का उपयोग करते हैं। सालभर में करीब 5 क्विंटल शहद की खपत होती है। हम खुद शहद पहाड़ी क्षेत्र से इसे लाते हैं। इसमें 6 प्रतिशत शिलाजीत होता है।
राधेश्याम शुक्ला, वैद्य, पचमढ़ी
Published on:
15 Oct 2022 04:46 pm
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