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लगातार बारिश-कीट प्रकोप से फिर पिटा सोयाबीन, किसानों को नुकसान

-पुरानी किस्मों में नहीं थी रोग प्रतिरोधक क्षमता, इसलिए बारिश-रोग नहीं झेल पाई फसल, दानों में कमी देख किसान किस्मत पर बहा रहे आंसू

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लगातार बारिश-कीट प्रकोप से फिर पिटा सोयाबीन, किसानों को नुकसान

लगातार बारिश-कीट प्रकोप से फिर पिटा सोयाबीन, किसानों को नुकसान

नर्मदापुरम. लगातार बारिश, खेतों में जमा पानी से सीडऩ-गलन के चलते तैयार सोयाबीन की फसल फिर पिट गई है। पुरानी किस्मों में रोग प्रतिरोधक क्षमता ही नहीं थी, कि वह इसे झेल पाए। फसलों में दानों की कमी को देख छोटे-मध्यम वर्ग के किसान अपनी किस्मत पर आंसू बहा रहे। पिछले चार-पांच सालों से हो रहे नुकसान के कारण ही किसानों का सोयाबीन से मोह भंग होकर इसकी जगह धान के रकबे को बढ़ाया है। इस बार जिले के सिवनीमालवा एवं इटारसी क्षेत्र में ही सोयाबीन फसल ली गई, उसमें भी आर्थिक नुकसान से किसान परेशान हैं। बता दें कि इस बार जिले में किसानों ने कुल खरीफ रकबे 3 लाख 1 हजार 36 हैक्टेयर में से मात्र 26 हजार 8 हैक्टेयर में ही सोयाबीन फसल ली है, जबकि बीते साल यह रकबा 28 हजार 10 हैक्टेयर था। किसानों ने जिस उम्मीदों से सोयाबीन की पैदावार लेनी चाही थी, उस पर बाारिश ने पानी फेर दिया है।

कभी सोयाबीन में अव्वल था, अब बंद हो रही खेती
नर्मदापुरम जिला बीते पांच साल पहले तक सोयाबीन के उत्पादन के मामले में प्रदेश में अव्वल हुआ करता था। लेकिन अब अन्य जिलों से काफी पीछे चला गया है। कारण सोयाबीन में बारिश-अतिवृष्टि, कीट प्रकोश होने से फसल लगातार खराब होती आ रही है। इस बार भी ऐसा ही कुछ हुआ। इस बार एवरेज उत्पादन 60 फीसदी पर आकर ही रूक गया। 40 फीसदी में नुकसान पहुंचा है।

इन किस्मों ने साथ नहीं दिया, हो गई खराब फसल
सोयाबीन की पुरानी किस्म 9560, 1050 एवं 2029 से फसल को नुकसान हुआ है। फसल खराब होने के बीच जो बची-कुची है उसमें भी एक एकड़ में 6 से 7 क्विंटल ही पैदावार निकल रही। 2117 किस्म में मात्र 2 से 3 क्विंटल ही एवरेज निकल रहा है।

ये है किसानों का दर्द...
जिन्होंने अधिक समय की पैदावार वाली किस्म बोई थी, उनको तो संतोषजनक उत्पादन मिलने की संभावना है। मेरी स्वयं की दो से तीन एकड़ उत्पादन की स्थिति है, क्योंकि मैंने कम दिन की बिजाई से बोनी की थी। इस कारण नुकसान हो रहा है।
-देवेंद्र पटेल, किसान शिवपुर

हमारे गांव में लगभग डेढ़ सौ एकड़ रकबे में किसानों ने सोयाबीन की बोवनी की थी। लेकिन अधिक बारिश के कारण एवं बीमारी से काफी नुकसान हुआ है। मात्र 2 से 3 एकड़ प्रति क्विंटल ही उपज निकल रही।
-राजेश साध, किसान ग्राम मलोखर इटारसी।
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मैंने 12 एकड़ में 2069 किस्म की सोयाबीन की फसल ली है। उसमें लगभग 7 एकड़ की फसल अधिक बारिश-कीट रोग से खराब हो गई है। शेष 5 एकड़ में ही पैदावार मिलने की उम्मीदें हैं।
-ओमप्रकाश इबने, किसान ग्राम कोठड़ा सिवनीमालवा।

इन किसानों की भी हुई फसल खराब
सिवनीमालवा के ग्राम रीछी के किसान कृष्ण चंद्र गोस्वामी ने बताया कि सोयाबीन की किस्म आरबीएस 18 के साथ ही ब्लैक बोर्ड 2017, 2069, 2034 ने अच्छा उत्पादन दिया, लेकिन 9560, 1050 एवं 2029 किस्म से नुकसान हुआ है। उत्पादन 6 से 7 क्विंटल प्रति एकड़ ही निकल रहा है। ग्राम रूपादेह के रामेश्वर जाट के मुताबिक गांव में सौ एकड़ सोयाबीन फसल ली गई। बहुतायत मात्रा में किसानों ने 2117 किस्म की बोवनी की थी। अधिक बारिश के कारण जहां समतल भूमि थी वहां मात्र 2 से 3 एकड़ का एवरेज आया है। जहां ढलान वाली भूमि थी वहां 5 से 6 क्विंटल प्रति एकड़ का एवरेज निकल रहा है।

इनका कहना है...
जिले में सिवनीमालवा-इटारसी तहसील क्षेत्र में ही इस बार सोयाबीन की फसल किसानों ने ली है। जिन किसानों ने फसल की बेहतर देखभाल की, पानी निकासी और कीट नियंत्रण किया है, उनकी उपज बेहतर निकल रही है। उत्पादन अच्छा आने की संभावनाएं हैं। जो किसान नुकसान की बात कर रहे हैं, उनके खेतों का परीक्षण कराकर कारणों का पता लगाया जाएगा। नुकसान हुआ है तो नियमानुसार उन्हें आरबीसी 6-4 के तहत प्रकरण तैयार करवाकर राहत दिलाने के प्रयास किए जाएंगे।
-जेआर हेडाऊ, उप संचालक कृषि नर्मदापुरम।