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अजय खरे.नरसिंहपुर. संगीत जीवन के अभावों को दूर करता है और जीवन में उमंग के रस घोलता है। संगीत न केवल अवसाद से निकालता है बल्कि खुशियों का संचार भी करता है। इसी को ध्यान में रखते हुए दिव्यांग बच्चों के लिए यहां म्यूजिक थैरेपी का अनूठा प्रयोग किया जा रहा है। सामाजिक न्याय एवं निशक्तजन विभाग ने इसके लिए योजना तैयार की है। जिसके तहत दिव्यांग स्कूली बच्चों का डाटा एकत्र किया जा रहा है। इन सभी बच्चों को संगीत से जोड़ा जाएगा और उन्हें कुशल संगीतकारों के माध्यम से संगीत की शिक्षा दी जाएगी। इसकी रिहर्सल के तौर पर विकासखंड मुख्यालय नरसिंहपुर, गोटेगांव व करेली में बच्चों को संगीत का प्रशिक्षण और म्यूजिक थैरेपी की शुरुआत की गई है। आगामी दिनों में बच्चों की कक्षाओं के संचालन को ध्यान में रखते हुए इसकी कक्षाएं संचालित की जाएंगी। कुछ बच्चों को इसके लिए हारमोनियम व अन्य वाद्य यंत्र प्रदान किए गए हैं।
बच्चों को संगीत सिखाने के लिए कला पथिक दल के कलाकारों की मदद ली जाएगी इसके अलावा जिले के अन्य संगीतकार व गीतकारों को भी इस काम से जोड़ा जाएगा। बच्चों की संख्या के हिसाब से स्कूल में ही या किसी के घर पर भी दिव्यांग बच्चों को संगीत सिखाया जाएगा। गौरतलब है कि जिले में गीत संगीत में रुचि रखने वाले कई कलाकार व संगठन हैं जो इसमें अपना योगदान दे सकते हैं।
इसके अलावा जिला दिव्यांग पुनर्वास केन्द्र में दिव्यांगजनों की फिजियोथैरेपी कराने और मानसिक दिव्यांगों को टीएलएम किट के माध्यम से प्रशिक्षित करने पर भी काम किया जा रहा है। दिव्यांग बच्चों की म्यूजिक थैरेपी व शिक्षण की बेहतर व्यवस्था के लिए बीआरसी, बीएसी व सीएसी स्कूलों में जाकर शिक्षण कार्य करेंगे और इसकी रिपोर्ट देंगे। ब्रेल लिपि की किताबें भी दिव्यांग बच्चों को प्रदान की जाएंगी।
वर्जन
दिव्यांग बच्चों के लिए म्यूजिक थैरेपी की योजना तैयार की गई है आगामी दिनों में बच्चों के स्कूली अवकाश व कक्षाओं को ध्यान में रखते हुए पूरी कार्य योजना के साथ संगीत की कक्षाएं शुरू की जाएंगी। जिले भर के स्कूली दिव्यांग बच्चों का डाटा एकत्र किया जा रहा है।
अंजना त्रिपाठी,सहायक संचालक सामाजिक न्याय एवं निशक्तजन विभाग
Published on:
12 Apr 2022 10:20 pm
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