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माहू लगने से प्रभावित होगा गेहूं का उत्पादन, दलहनी फसलों को नुकसान

शीत लहर का प्रकोप, ठिठुर रहे लोग, कृषि वैज्ञानिकों ने गांवों का भ्रमण कर देखी स्थिति

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माहू लगने से प्रभावित होगा गेहूं का उत्पादन, दलहनी फसलों को नुकसान

माहू लगने से प्रभावित होगा गेहूं का उत्पादन, दलहनी फसलों को नुकसान

नरसिंहपुर. पिछले 3 दिनों से मौसम में बदलाव के कारण तापमान में लगातार गिरावट आने से जनजीवन प्रभावित हुआ है। इसके अलावा 3.20 लाख हेक्टेयर में लगी रबी की फसलों पर भी प्रभाव पडऩे लगा है। वहीं शीतलहर से गेहूं की फसल की जड़ सडऩे की जानकारी मिली है। कृषि विज्ञान केन्द्र की ओर से क्षेत्र भ्रमण में पाया गया है कि ग्राम मेख, चिरचिटा, करपगांव, बोहानी में गेहूं की फसल की जड़ सडऩे के साथ माहु का प्रभाव पाया गया है। इससे गेहूं की फसलों को नुकसान होने की आशंका व्यक्त की गई है। वहीं माना जाता है कि अगर शीत लहर का प्रकोप ज्यादा दिनों तक रहा तो इसमें पाला से दलहनी फसलों को भी नुकसान पहुंच सकता है। फसलों को नुकसान की आशंका में अब कृषि विज्ञान केन्द्र नरसिंहपुर द्वारा जिले के किसानों को मौसम के अनुरूप सामयिक सलाह जारी की है।
वैज्ञानिकों ने बताया कि संभावना व्यक्त की गई है कि 6 एवं 7 जनवरी को प्रदेश में कहीं- कहीं हल्की बारिश होने के साथ ही गरज-चमक के साथ मध्यम से तेज हवा बहने की भी संभावना हैं। मौसम में आए परिवर्तन एवं कोहरे से सबसे ज्यादा नुकसान दलहनी एवं सब्जी की फसलों में होता है। सब्जी की फसलों में पत्तियां चौड़ी होती हैं, उनमें ज्यादा नुकसान होता है। जैसे आलू, टमाटर, गोभी, भिंडी, सरसों, मूली के साथ दलहनी फसलों जैसे अरहर, चना, मसूर में ज्यादा नुकसान की आशंका है।
ऐसे करें फसल बचाने के उपाय
कृषि विज्ञान केन्द्र के अनुसार यदि रात का तापमान 7 डिग्री से नीचे हो, बदरी हो तो आलू, टमाटर, मुली में आगेती झुलसा आता है। पाला व झुलसा से फसल बचाने के लिए फसलों में पानी दें, शाम 7 बजे के बाद मेड़ो पर धुंआ करें या थाओ यूरिया 250 ग्राम/ एकड़ की दर से छिडक़ाव करें। सब्जी फसल में बचाव के लिए मेंकोजेब 400 से 600 ग्राम प्रति एकड़ 200 लीटर पानी के साथ छिडक़ाव करें। छिडक़ाव करने से फंफूदनाशी पत्तियों पर परत बना लेती है, जिससे तापमान बढ़ जाता है और फसल सुरक्षित हो जाती है। साथ ही उसमें पाला लगने की आशंका काफी कम हो जाती है। अगर यह नहीं कर सकते हैं तो किसान धुंआ जरूर करें। धुंआ करने से तापमान में वृद्धि होगी। दलहनी फसलों जैसे चना, मसूर, मटर में पानी नहीं दिया है, तो 3 घंटे की शिफ्ट में हल्का पानी भी दे सकते हैं। इससे पाले का ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ेगा। वहीं गेहूं जड़ सडऩ की रोकथाम के लिए कार्बनडाजिम प्लस मेंकोजेब 400 ग्राम प्रति एकड़ या टेबोकोनोजोल प्लस सल्फर 400 ग्राम प्रति एकड़ 200 लीटर के साथ छिडक़ाव करें। जड़ माहू नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोप्रिड 17.8 प्रतिशत 100 मिली प्रति एकड़ के मान से छिडक़ाव किया जा सकता है।
कहां कितनी रबी की फसल
जिले में इस वर्ष गेहूं 110 हजार हेक्टेयर, चना 88 हजार हेक्टेयर, मटर 20 हजार हेक्टेयर, मसूर 36 हजार हेक्टेयर, सरसों 3 हजार हेक्टेयर, गन्ना 65 हजार हेक्टेयर में लगाई गई है।
इनका कहना है
तीन दिनों से लगातार ठंड जारी है, आसमान साफ दिखने से रात में अधिक ठंड पड़ेगी। इससे पाला पडऩे की आशंका अधिक बढ़ जाती है। किसान अपने फसलों को बचाव के लिए सामान्यत: धुंआ और सिंचाई के माध्यम से अधिक सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं।
आशुतोष शर्मा, कृषि वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केन्द्र नरसिंहपुर