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नरसिंहपुर जिले में सार्वजनिक स्थलों पर पानी की सुरक्षा पर टीडीएस बढ़ा रहा संशय

पत्रिका ने शहर के प्रमुख स्थलों पर बनी टंकियों से पानी लेकर जब वॉटर टेस्टिंग किट टीडीएस के जरिए जांच की

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प्रशासन का अमला भी पानी की स्वच्छता को लेकर जहां अलर्ट नजर आ रहा है

जिला अस्पताल में बनी टंकी का पानी और टीडीएस।

high alert regarding water quality नरसिंहपुर. जिले में इंदौर की घटना के बाद आमजन के साथ ही प्रशासन का अमला भी पानी की स्वच्छता को लेकर जहां अलर्ट नजर आ रहा है। वहीं सार्वजनिक स्थलों पर आमजन जिन टंकियों से पानी लेकर प्यास बुझाता है उन टंकियों की न केवल हालत खराब है बल्कि उसमें से मिलने वाले पानी में टीडीएस अर्थात कुल घुलित ठोस पदार्थ की मात्रा अधिक मिलने से इस पानी की सुरक्षा व स्वच्छता पर संशय बना है। हालांकि जागरुकता की कमी व लाचारी में आमजन इन्हीं टंकियों का पानी पीकर अपनी प्यास बुझाने विवश है क्योंकि खरीदकर पानी पीना हर किसी के लिए संभव नहीं है। गुरुवार को पत्रिका ने शहर के प्रमुख स्थलों पर बनी टंकियों से पानी लेकर जब वॉटर टेस्टिंग किट टीडीएस के जरिए जांच की तो परिणाम चौकानें वाले मिले।
जिला अस्पताल की टंकी में टीडीएस 764
जिला अस्पताल नरसिंहपुर में हर दिन सैंकड़ों मरीज आते हैं। जिनको ब्लड बैंक के सामने बनी टंकी से पानी लेकर प्यास बुझानी पड़ती है। पत्रिका ने जब ग्लास में टंकी का पानी लेकर उसमें किट के जरिए टीडीएस जांचा तो वह 764 मिला। कई मरीज और उनके परिजन इसी टंकी से पानी लेते नजर आए। लेकिन उन्हें पता ही नहीं कि टंकी का पानी कितना सुरक्षित है।
कलेक्ट्रेट की टंकी के पानी में टीडीएस 586
कलेक्ट्रेट परिसर में हर दिन जिले के कई स्थानों से लोग पहुंचते हैं। यहां बनी टंकी से लोग प्यास बुझाने पानी लेते हैं। इस टंकी के पानी की शुद्धता जांचने जब किट का प्रयोग किया तो इसमें टीडीएस 586 दर्ज हुआ।
इंजीनियर चौराहा की टंकी के पानी में टीडीएस 616
नगर के प्रमुख इंजीनियर चौराहा पर बाल संप्रेक्षण गृह के पास बनी टंकी से राहगीर, स्कूल-कॉलेज जाने वाले छात्र-छात्राओं समेत आसपास दुकानें लगाने वाले व्यापारी पानी लेते हैं। इस टंकी के पानी की किट से हुई जांच में टीडीएस 616 दर्ज हुआ।
बस स्टैंड की टंकी के पानी में टीडीएस 709
बस स्टैंड पर भी दिन रात लोगों की आवाजाही रहती है। लोग यहां प्रतीक्षालय में स्थित टंकी का पानी पीने एवं अन्य उपयोग के लिए लेते हैं। यहां जब पानी की टेस्टिंग की गई तो उसमें टीडीएस 709 दर्ज हुआ।
मंडी की टंकी के पानी में टीडीएस 463
मंडी परिसर में किसानों, व्यापारियों, हम्मालों की हर दिन भीड़ रहती है। अधिकांश लोग यहां बनी टंकियों से पानी लेकर पीते हैं। यहां टंकी की हालत खराब है, आसपास गंदगी फैली है। इस टंकी के पानी की जांच में टीडीएस 463 दर्ज हुआ।
रेलवे स्टेशन के पानी में टीडीएस 419
रेलवे स्टेशन नरसिंहपुर पर भी यात्री, कर्मचारी यहां बनी टंकियों के पानी का उपयोग करते हैं। यहां प्लेटफार्म क्रमांक एक पर स्थित टंकी के पानी की जब किट से जांच की गई तो टीडीएस 419 मिला।
बाक्स
निकाय के अमले ने कराई कई जगह जांच, आज आएगी रिपोर्ट
नगरपालिका के अमले ने भी गुरुवार को कई स्थानों से हाइड्रोजन सल्फाइड परीक्षण किया है। जिसमें शीशी में केमीकल्स डालने के बाद उसमें सार्वजनिक स्थानों पर लगे नलों के पानी को डाला है। जिससे पता चल सके कि पानी की शुद्ध आपूर्ति हो रही है कि नहीं। निकाय की जलप्रदाय शाखा के इंजी. पुरुषोत्तम बाडबुडे एवं प्रदीप नगाइच ने बताया कि 24 घंटे के बाद यह जांच पूरी होती है। निकाय ने जो सैंपल जांच के लिए पीएचई को भेजे हैं उनकी रिपोर्ट भी आज शुक्रवार को मिलने की संभावना है। निकाय द्वारा सार्वजनिक स्थानों पर बनी टंकियों के पानी की भी जांच कराई जा रही है। जिससे कहीं भी अशुद्ध पानी न पहुंच सके।
वर्जन
टीडीएस किट से जांच में पानी की जांच का अनुमान मिल जाता है, जहां टीडीएस अधिक मिलता है तो उसकी जांच लैब में ही होना चाहिए जिससे सही आंकलन हो सके। किट की जांच में अधिक टीडीएस आने के कारण कई हो सकते हैं, निकाय को ऐसे स्थानों के सैंपल लेकर जांच कराना चाहिए। यह सही है कि टीडीएस 500 से अधिक नहीं होना चाहिए।
आरएस ठाकुर, कार्यपालन यंत्री लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग नरसिंहपुर

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