वहीं दूसरी ओर कबीरपंथी अनुयायी बेहद सादगी से विवाह के आयोजन संपन्न कराते हैं। जिसमें न कोई साज सज्जा होती है, न बैंड बाजे, न कोई दहेज, न खर्चीले रितिरिवाज। यहां तक कि दूल्हा दुल्हन भी सादे कपड़े पहने हुए होते हैं। कबीरपंथी प्रथा में महज 16 मिनट 34 सेकंड के रमैनी दोहों के उच्चारण के बीच विवाह संपन्न हो जाता है। इसी प्रकार कबीरपंथ के संत रामपाल महाराज के अनुयायियों द्वारा बीते दिवस करपगांव में आयोजित भक्त मिलन कार्यक्रम में आयोजित विवाह सम्मेलन में दो जोड़ों के विवाह किए। जिसमें एक अंतर्जातीय विवाह भी संपन्न हुआ।