गाडरवारा। भगवान को अपने भक्तों से विशेष प्रेम होता है। भगवान भक्त का मान सम्मान घटने नहीं देते, भक्त का मान बढ़ाने भक्ति को असंख्य गुणा बड़ा कर देते हैं। नरसी मेहता की बेटी के विवाह में मुनीम का रूप रखकर सांवल सेठ का रूप रखकर, एक प्रसंग में नाई का रूप रखकर, एकनाथ जी की सेवा में गरीब ब्राह्मण नौकर श्रीखंड्या का रूप, सकू बाई गृहणी का रूप रखकर भक्तों का मान बढ़ाया। जो अहंकार रहित होता है। भगवान उसे प्रेम करते हैं, छोटे बच्चों के समान संत भी सभी जीवों का समान रुप से प्रिय होते हैं। परमात्मा प्राप्ति होने पर भी साधुता परिपक्व नहीं होती। वह धन्य है जो दीन दुखियों अभावग्रस्तों की सेवा में लग जाता है। उक्त आशय के विचार ऋषिकेश कैलाश आश्रम हरिद्वार से पधारे पूज्य स्वामी सदाशिव नित्यानंद गिरी जी महाराज ने भक्तों के चरित्र की कथा श्रवण कराते हुए श्रीराम भवन परिसर कृषि उपज मंडी गेट नंबर 3 के सामने उपस्थित श्रोताओं के समक्ष व्यक्त किए। स्वामी जी ने आगे बताया कि संत छोटे निर्मल हृदय बच्चों के समान होते हैं। छोटे बच्चों को मां गोदी में लेकर घूमती है उस आयु में वे अहंकार रहित होते हैं। उम्र बढऩे पर उनमें दोष आते हैं, पर संतों में ऐसा नहीं होता। श्रीकृष्ण यशोदा मां की लीला में मां यशोदा श्रीकृष्ण की याद में भावुक हो जाती हैं। यशोदा मां जगत माता हैं। अहम बहुत सूक्ष्म होता है, भक्त में अहंकार नहीं होता। चैतन्य महाप्रभु अहंकार रहित दिव्य भक्ति का रूप हुए। चैतन्य महाप्रभु तारण तरण भक्त हैं, बंगाली वाममार्गी तंत्र मंत्र के उपासक घोर नास्तिक विचार के हुआ करते थे। अत्यंत विपरीत समय में चैतन्य प्रभुजी ने भक्ति रूप हरे राम, हरे राम, राम राम हरे हरे, हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे के मंत्र का प्रचार प्रसार किया। जिस आहार में हिंसा होती है वह हमारा आहार नहीं हो सकता। आहार की शुद्धता सभी प्रकार की उन्नति का आधार ह। स्वामी जी ने आगे के प्रसंग में बताया कि कंचन कीर्ति में आनंद नहीं होता है। संतों ने कहा प्रतिष्ठा सूकरी विष्ठा है। साधक की प्रथम गुरु मां है, सत्संग के सूत्र पकड़ो तो कल्याण होगा। असली गहना तो राग द्वेष रहित होना अहंकार रहित होना है। संतो की बात पकड़ें, लात नहीं पकड़ें। जो दुखों का हरण करें वह हरि हैं। भगवान का नाम जब सच्चा सौदा है, कथा चरित्र में अयोध्या के श्री राम किशोर दास जी महाराज का भी सत्संग लाभ मिल रहा है। प्रात: काल में पतंजलि योग शिविर हरिद्वार के पंडित हरिओम शर्मा द्वारा भी प्राणायाम योगासन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।