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दंड संहिता की जगह लेंगे 3 नए आपराधिक कानून, एक जुलाई से होंगे लागू

locationनई दिल्लीPublished: Feb 24, 2024 03:37:20 pm

Submitted by:

Akash Sharma

तीन नए आपराधिक कानून भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, और भारतीय साक्ष्य (द्वितीय) विधेयक, 2023 ये तीनों 1860 की भारतीय दंड संहिता, 1973 की आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी), 1872 का भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह लेंगे।

Union Home Minister Amit Shah

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह

सरकार ने शनिवार को अधिसूचित किया कि भारतीय दंड संहिता, आपराधिक प्रक्रिया संहिता और साक्ष्य अधिनियम की जगह लेने वाले तीन नए आपराधिक कानून 1 जुलाई से लागू होंगे। तीन नए आपराधिक कानून भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, और भारतीय साक्ष्य (द्वितीय) विधेयक, 2023 ये तीनों 1860 की भारतीय दंड संहिता, 1973 की आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी), 1872 का भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह लेंगे। नए कानूनों का उद्देश्य आतंकवाद की स्पष्ट परिभाषा देने, राजद्रोह को अपराध के रूप में खत्म करना और कई अन्य बदलावों के साथ-साथ राज्य के खिलाफ अपराध नामक एक नया खंड पेश करना, ब्रिटिश-युग के कानूनों को पूरी तरह से बदलना है।

तीनों कानूनों को संसद ने मंजूरी दे दी

इन तीन विधेयकों को पहली बार अगस्त 2023 में संसद के मानसून सत्र के दौरान पेश किया गया था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पिछले दिसंबर में उन पर अपनी सहमति दे दी थी। होम मामलों की स्थायी समिति द्वारा कई सिफारिशें करने के बाद, पुन: प्रारूपित संस्करण शीतकालीन सत्र में पेश किए गए थे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि विधेयकों का मसौदा व्यापक विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया था और उन्होंने खुद इस मसौदे के हर अल्पविराम और पूर्णविराम को देखा था।

न्याय प्रणाली में भारत का स्थान होगा ऊपर- शाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पिछले साल संसद में इन्हें पेश करते हुए कहा था कि नए कानून भारतीयता, भारतीय संविधान और लोगों की भलाई पर जोर देते हैं। उन्होंने कहा कि तीन कानूनों के तहत सभी प्रणालियां लागू होने के बाद भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली पांच साल में दुनिया में सबसे उन्नत बन जाएगी।

कैसे है देश के लिए उपयोग

IPC की जगह लेने के लिए तैयार BNS ने बदलते समय को देखते हुए आपराधिक कानूनों के प्रमुख पहलुओं में सुधार किया है। यह उन कानूनों को प्राथमिकता देता है जो महिलाओं और बच्चों की रक्षा करते हैं, हत्यारों को दंडित करते हैं, और उन लोगों को रोकते हैं जो राज्य को नुकसान पहुंचाएंगे। BNS में संगठित अपराध, आतंकवादी कृत्य, मॉब लिंचिंग, हिट-एंड-रन, धोखेबाज तरीकों से एक महिला का यौन शोषण, छीनना, भारत के बाहर उकसाना, भारत की संप्रभुता, अखंडता और एकता को खतरे में डालने वाले कृत्य जैसे 20 नए अपराध शामिल हैं।

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