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‘मैं हमेशा केजरीवाल का आभारी रहूंगा’, AAP से बगावत करने वाले सांसद ने ऐसा क्यों कहा? पार्टी में फूट का कारण भी बता दिया

आम आदमी पार्टी के 7 राज्यसभा सांसदों के भाजपा में शामिल होने से बड़ा सियासी भूचाल आया है। बागी नेताओं ने पार्टी में अंदरूनी कलह और वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी को वजह बताया है। इस घटनाक्रम ने अरविंद केजरीवाल और AAP की रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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भारत

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Anurag Animesh

Apr 27, 2026

arvind kejriwal

Arvind Kejriwal(AI Image-ChatGpt)

7 AAP MPs join BJP: देश की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों का एक साथ भारतीय जनता पार्टी में शामिल होना किसी झटके से कम नहीं माना जा रहा। पार्टी के गठन के बाद यह शायद पहला मौका है, जब इतने बड़े स्तर पर अंदरूनी टूट सामने आई है। सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर पार्टी के भीतर ऐसा क्या हुआ कि इतने वरिष्ठ नेता एक साथ अलग हो गए। क्या इसकी भनक अरविंद केजरीवाल को नहीं लगी? या फिर मामला काफी समय से पक रहा था?

विक्रमजीत सिंह साहनी ने क्या कहा?


इन सवालों के बीच बागी राज्यसभा सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी का बयान सामने आया है।मीडिया से बात करते हुए उन्होंने साफ कहा कि यह कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था। सभी सात सांसदों ने मिलकर, सोच-समझकर यह कदम उठाया। उनके मुताबिक, पार्टी के भीतर हालात ऐसे बन गए थे कि अलग रास्ता चुनना ही बेहतर लगा। साहनी बताते हैं कि उनका मुख्य फोकस हमेशा पंजाब के लोगों के मुद्दे रहे। संसद में भी उन्होंने वही उठाया। उनका कहना है कि कई बार केंद्र सरकार और भाजपा के साथ उनके अच्छे संबंधों की वजह से भी काम आसान हुआ, खासकर तब जब विदेशों में फंसे पंजाब के लोगों को वापस लाने की जरूरत पड़ी।

नेताओं को किनारे कर दिया गया- सांसद


लेकिन असली बात, जो बार-बार सामने आ रही है, वह है पार्टी के अंदर बढ़ती दूरी। साहनी का आरोप है कि राघव चड्ढा, स्वाति मालीवाल और संदीप पाठक जैसे नेताओं को धीरे-धीरे किनारे कर दिया गया। ये वही चेहरे थे, जिन्होंने पार्टी को खड़ा करने में अहम भूमिका निभाई थी। पंजाब चुनाव 2022 का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उस समय संदीप पाठक और राघव चड्ढा ने पूरी ताकत झोंक दी थी। उम्मीदवारों के चयन से लेकर कैंपेन तक, सब कुछ उन्होंने संभाला। नतीजा सबके सामने था, पार्टी को जबरदस्त जीत मिली। लेकिन बाद में हालात बदलते गए।

नेताओं पर बढ़ गया था दवाब


साहनी के मुताबिक, पहले स्वाति मालीवाल को साइडलाइन किया गया। फिर दिल्ली चुनाव में हार के बाद संदीप पाठक पर दबाव बढ़ा। राघव चड्ढा भी चीजें सुधारने की कोशिश करते रहे, लेकिन आखिरकार उन्हें भी अलग-थलग कर दिया गया। यहां तक कि उन्हें एक ऐसे सलाहकार बोर्ड में भेज दिया गया, जो सक्रिय ही नहीं था। इन सब घटनाओं ने नेताओं के मन में असमंजस पैदा किया। सवाल उठने लगा कि पार्टी की दिशा क्या है और खासकर पंजाब के भविष्य को लेकर क्या सोच है।

मैं हमेशा केजरीवाल का आभारी रहूंगा- साहनी


अपनी बात रखते हुए विक्रमजीत सिंह साहनी ने कहा कि वो हमेशा केजरीवाल के आभारी रहेंगे कि उन्होंने मुझे राज्यसभा सांसद बनाया। जिससे मुझे पंजाब के लिए काम करने का मौका मिला।