सतर्क हो जाएं। अपने पशुओं को अगर सड़क पर आवारा घूमने देंगे तो आपको जेल जाना पड़ सकता है। अहमदाबाद में पुशओं के आवारा घूमने की वजह से पशु मलिक को जेल की हवा खानी पड़ रही है।
सड़कों पर आवारा पशुओं के घूमने से होने वाली दुर्घटना और उससे पैदा होने वाले खतरे को लेकर गुजरात हाईकोर्ट संजीदा है। हाईकोर्ट ने सरकार से कई बार मांग कीकि, इस पर कड़ी कार्रवाई की जाए। अब इसकी शुरूआत हो गई है। एडिशनल सेशन कोर्ट अहमदाबाद ने इसकी पहल की है। अपनी गाय को सड़क पर खुला छोड़ने और लोगों के जीवन को खतरे में डालने के आरोप में प्रकाश जयराम देसाई को छह माह की सजा सुनाई गई है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सारंगा व्यास ने आवारा मवेशियों को पकड़ने के लिए गई अहमदाबाद नगर निगम के मवेशी उपद्रव नियंत्रण विभाग (सीएनसीडी) की टीम को धमकी देने के लिए व्यक्ति को दो साल की सजा सुनाई।
दोषी ने सीएनसीडी टीम को दी थी धमकी
शाहपुर निवासी प्रकाश जयराम देसाई पर 27 जुलाई, 2019 को मामला दर्ज किया गया था। उन आरोप था कि, सीएनसीडी टीम को उनके शाहपुर दरवाजा के बाहर शांतिपुरा छपरा के पास पांच जानवर मिले थे। टीम के ऐक्शन लेने पर देसाई ने टीम के सदस्यों को धमकी दी। उन्होंने कहाकि, वह उनकी शिकायत एंटी करप्शन ब्यूरो के अधिकारियों से कर उन्हे पकड़वा देंगे।
अभियोजन पक्ष ने पेश किए छह गवाह
प्रकाश जयराम देसाई पर आईपीसी की धारा 308, 289, 186 और 506 (2), गुजरात पुलिस अधिनियम और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था। अभियोजन पक्ष ने ट्रायल कोर्ट के समक्ष छह गवाहों का परीक्षण कराया। कोर्ट के समक्ष दो पंच गवाहों ने अभियोजन पक्ष के मामले का समर्थन नहीं किया, क्योंकि वे देसाई समुदाय से संबंधित थे।
उचित व्यवस्था न करने पर दोषी
हालांकि, छापेमारी दल के सदस्यों ने देसाई के खिलाफ गवाही दी। उन्होंने कहाकि, हालांकि देसाई के मवेशियों के सड़क पर भटकने से कोई घायल नहीं हुआ। कोर्ट ने कहा कि, आईपीसी की धारा 308 लागू नहीं होगी। हालांकि, उन्हें उचित व्यवस्था किए बिना अपने जानवरों को सड़कों पर खुला छोड़ देने और लोगों की जान जोखिम में डालने का दोषी पाया गया।
गुजरात सरकार ने वापस लिया विधेयक
आवारा पशुओं की शहरी इलाकों में आवाजाही रोकने वाले विधेयक के लिए गुजरात सरकार ने एक एक विधेयक मार्च 2022 में विधानसभा में पारित किया था। विधेयक में पशुपालकों के लिए मवेशी पालने के लिए लाइसेंस अनिवार्य कर दिया गया था। और उनके पशुओं को आवारा घूमते पाए जाने पर जेल तक की सजा का प्रावधान किया गया था। जिसका काफी विरोध हुआ। विधानसभा चुनाव को देखते हुए 22 सितम्बर को गुजरात सरकार ने इस विधेयक का वापस ले लिया।
गुजरात हाई कोर्ट की नाराजगी
पर गुजरात हाई कोर्ट ने आवारा पशुओं को सड़क पर घूमने से रोकने को लेकर काफी सजग है। इसके लिए हाईकोर्ट ने गुजरात सरकार को फटकार भी लगाई थी। एक याचिका की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने ऐसा किया।
वडोदरा में हुई थी दो साल पहले सजा
गुजरात के वडोदरा में सड़कों पर आवारा घूमते पशुओं की समस्या से निजात की दिशा में कदम उठाते हुए कोर्ट ने मई 2019 में पशुओं के मालिकों को 3 महीने जेल की सजा सुनाई थी।