
AI revolution: दुनिया के हर क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग लगातार बढ़ता जा रहा है। भारत सरकार ने भी 'क' से लेकर 'ज्ञ' तक जीवन के हर क्षेत्र में एआई क्रांति लाने की तैयारी कर ली है। औद्योगिक क्षेत्र में इसका व्यापक उपयोग बढ़ा है। आम आदमी के जीवन को आसान बनाने के लिए केंद्र सरकार ने इंडिया एआई मिशन शुरू किया है। आम जनजीवन से जुड़ी स्वास्थ्य, शिक्षा, बैंकिंग, बीमा, खेती, न्यायालय, रेलवे जैसी सेवाओं में एआई को अपनाया जाएगा। इसके लिए केंद्र सरकार ने 10 हजार 371 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं, जिसमें इस साल 551 करोड़ रुपए खर्च करने का लक्ष्य है।
एआई को अपनाने में भारत की तेजी दिखने लगी है। स्टैनफोर्ड एआई इंडेक्स रिपोर्ट 2024 में भारत का एआई कौशल प्रसार और गिटहब एआई परियोजना में पहला स्थान है। ऑक्सफोर्ड एआई रेडिनेस इंडेक्स में भारत 40 वें स्थान पर है। नैसकॉम एआई एडॉप्शन इंडेक्स में भारत को 4 में से 2.5 अंक मिले हैं। यह स्कोर भारत में एआई के महत्त्वपूर्ण संभावित मूल्य को दर्शाता है। अनुमान है कि भारत वित्त वर्ष 2025-26 तक 500 अरब डॉलर के अवसर को छू सकता है।
एआई से जहां बड़ी संख्या में नौकरियों पर खतरा बताया जा रहा है, वहीं यह मशीन लर्निंग विशेषज्ञ और सूचना सुरक्षा विश्लेषक बनने के अवसर भी लेकर लाया है। इसके लिए सरकार भी युवाओं को ट्रेनिंग दे रही है। भारत में एआई तकनीक को बढ़ाने में हो रहे प्रयासों के चलते केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव का नाम टाइम मैगजीन के टॉप 100 लोगों में शामिल हो चुका है।
एआई सभी उम्र के लोगों के सीखने के तरीके को बदल रहा है। यह भाषाई बाधाओं को खत्म कर रहा है। सरकार ने भाषिणी परियोजना 2022 में शुरू की, जिसमें 495.51 करोड़ रुपए का बजट तय किया गया था। इसका उद्देश्य 22 अनुसूचित भारतीय भाषाओं के लिए एआई संचालित अनुवाद तकनीक विकसित करना है।
इसके लिए राष्ट्रीय सार्वजनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किया जा चुका है। इसके अलावा एआई का उपयोग पाठ्यपुस्तकों को डिजिटल बनाने, साहित्यिक चोरी का पता लगाने के लिए भी हो रहा है।
एमईआईटीवाई ने सीडेक के साथ मिलकर एआई अनुसंधान, विश्लेषण और ज्ञान प्रसार प्लेटफॉर्म (एरावत) विकसित किया है। इस प्लेटफार्म की कंप्यूटिंग क्षमता 200 एआई पेटाफ्लॉप्स तक है। इसका उपयोग एनआईसी समेत अनुसंधान प्रयोगशालाओं, वैज्ञानिक समुदाय और स्टार्ट अप कर सकते हैं।
एआई की मदद से पैदावार बढ़ाने से लेकर मौसम का पूर्वानुमान तक लगाया जा सकता है। दूध उत्पादन में पशुओं की निगरानी में मदद कर रहा है। कृषि मंत्रालय ने 11 भारतीय भाषाओं में पीएम किसान के बारे में एआई सक्षम किसान ई-मित्र बॉट लॉन्च किया है, ताकि जानकारी आसानी से उपलब्ध हो सके।
कानून और न्याय मंत्रालय एआई सक्षम एसयूवीएएस (सुप्रीम कोर्ट विधिक अनुवाद सॉफ्टवेयर का उपयोग कर रहा है। यह क्षेत्रीय भाषाओं में निर्णयों को अनुवाद में सहायता करता है।
संसद भी एआई क्रांति के तालमेल बिठा रही है। डिजिटल संसद ऐप पर एआई विधायी प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने और पारदर्शिता बढ़ाने में सहायक साबित हो रहा है। इसके माध्यम से संसदीय कार्यवाही के सटीक लेखन में मदद मिल रही है।
एआई की मदद से वित्त, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय की ओर से बैंक, बीमाकर्ता और वित्तीय संस्थानों में धोखाधड़ी का पता लगाने, ऑडिट करने और ऋण के लिए ग्राहकों का मूल्यांकन करने जैसे कई काम शुरू कर दिए गए हैं।
यात्रियों के लिए रेलवे की सेवाओं को बेहतर व सुरक्षित बनाने के लिए एआई का उपयोग हो रहा है। रेलवे चालकों पर निगरानी के लिए एआई का उपयोग भी शुरू होने जा रहा है। सिग्नलिंग, ओवरहेड उपकरण, केरिज और वैगन, सामग्री प्रबंधन और सुरक्षा से जुड़े मामलों में एआई की मदद ली जा रही है।
बड़ी डेटा विश्लेषण क्षमताओं के चलते एआइ का स्वास्थ्य सेवा में उपयोग बहुत तेजीे से बढ़ रहा है। एआई बीमारियों को अधिक तेजी से सटीक पता लगाने, दवा की खोज को गति देने में मदद कर रहा है।
इस कार्यक्रम में एआई से जुड़े 119 पाठ्यक्रम शामिल हैं। अब तक 1.27 लाख से अधिक युवा प्रशिक्षित हो चुके हैं। 1236 सरकारी अधिकारियों व 292 प्रशिक्षकों को एआई में प्रशिक्षित किया जा चुका है।
इसका उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिकी प्रणाली डिजाइन व विनिर्माण और आइटी क्षेत्र में एआई और उभरती तकनीक में पीएचडी बढ़ाना है। पहले चरण में 466 करोड़ और दूसरे चरण में 481.93 करोड़ रुपए आबंटित किए गए हैं।
इस कार्यक्रम का लाभ 35 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 52 हजार छात्रों को मिल चुका है। वहीं 2552 स्कूलों के 2536 शिक्षकों को एआई के बुनियादीे ज्ञान की जानकारी दी गई है।
नेशनल ई-गवर्नेंस डिवीजन व एमईआईटीवाई ने एआई कार्यक्रम शुरू किया। इसके तहत कक्षा 8 से 12 तक के स्कूली छात्रों को एआई तकनीक और सामाजिक कौशल प्रदान किया जाना है।
इंडिया एआई मिशन के तहत देश के टियर 2-3 शहरों में डेटा और एआई लेब, डेटा और एआई केंद्र तैयार होंगे। यहां एनोटेशन, डेटा क्लीनिंग, डेटा एनालिटिक्स जैसे पाठ्यक्रम शुरू हो सकेंगे।
Published on:
09 Sept 2024 08:24 am
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