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पहले बिहार और अब महाराष्ट्र निकाय चुनाव में AIMIM को मिली बंपर जीत, क्या पश्चिम बंगाल में ममता की नींद उड़ाएंगे ओवैसी?

महाराष्ट्र निकाय चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी को बंपर जीत मिली है। छत्रपति संभाजी नगर में AIMIM ने 33 सीटें जीती। पार्टी का प्रदर्शन मनसे और एनसीपी (शरद चंद्र पवार) से भी बेहतर रहा है। क्या अब ओवैसी ममता बनर्जी की परेशानी की वजह बनेंगे। पढ़ें पूरी खबर...

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Asaduddin Owaisi

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी (Photo-IANS)

सियासत के आसमान में ओवैसी की पतंग (चुनाव चिन्ह) जमकर उड़ रही है। पहले बिहार और अब महाराष्ट्र निकाय चुनाव में हैदराबाद से सांसद असुदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) को बंपर जीत मिली है। राज्य भर की अलग-अलग नगर निकायों में उनकी पार्टी ने 114 सीटों पर जीत दर्ज की है। स्थानीय चुनाव में विपक्षी दलों की फूट का फायदा ओवैसी की पार्टी को पहुंचा है। AIMIM पार्टी के नेता शारिक नक्शबंदी ने कहा कि नगरीय निकाय चुनाव के दौरान पार्टी प्रमुख ओवैसी ने घर-घर जाकर प्रचार किया। इसका फायदा पार्टी को मिला।

मनसे और एनसीपी (शरद) को AIMIM ने पीछे छोड़ा

दिलचस्प बात यह है कि ओवैसी की पार्टी AIMIM ने इस निकाय चुनाव में महाराष्ट्र की दो क्षेत्रीय पार्टियों राज ठाकरे की MNS और शरद पवार की NCR (SP) से भी बेहतर प्रदर्शन किया है। पार्टी ने कुल 114 सीटें जीतीं। इसमें सबसे अधिक 33 सीटें छत्रपति संभाजी नगर में, 21 मालेगांव में, नांदेड़ में 13, धुले में 10, मुंबई में 8, सोलापुर में 8, ठाणे में 5, अमरावती में 11 नागपुर और परभणी में एक-एक सीट जीती।

AIMIM ने महाराष्ट्र में पहली चुनावी सफलता 2012 के नांदेड़ नगर निगम चुनावों में हासिल की थी, जब उसने 81 सदस्यों वाली नगर निकाय में 11 सीटें जीती थीं, जो तेलंगाना के बाहर किसी राज्य में उसकी पहली जीत थी। AIMIM के इस उभार से अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी को भी तगड़ा झटका लगा है। सपा, अब महाराष्ट्र के मुस्लिम बाहुल्य कई इलाकों में अपना प्रभाव खो रही है। इसका फायदा AIMIM को मिला।

बिहार में भी मिली थी ओवैसी को बंपर जीत

बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी महागठबंधन में शामिल होना चाहती थी, लेकिन राजद नेता तेजस्वी यादव ने ओवैसी को ज्यादा भाव नहीं दिया। इसके साथ ही, एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने हैदराबाद के सांसद को एक्सट्रिमिस्ट करार दे दिया। ओवैसी ने विधानसभा चुनाव के दौरान सीमांचल (पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज और अररिया) में महागठबंधन के प्रत्याशियों को तगड़ा नुकसान पहुंचाया और 5 सीटें भी जीतीं। पिछले विधानसभा चुनाव यानी 2020 में भी ओवैसी ने इसी इलाके में पांच सीटें जीती थी, लेकिन उनके 4 विधायक बाद में राजद में शामिल हो गए थे। जिसके बाद माना जा रहा था कि साल 2025 में ओवैसी कमाल नहीं दिखा पाएंगे, लेकिन रिजल्ट चौंकाने वाले निकले।

पश्चिम बंगाल पर है नजर

AIMIM और असदुद्दीन ओवैसी की नजर अब बंगाल विधानसभा चुनाव पर भी है। पश्चिम बंगाल में कुल 23 जिले हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार, कुल आबादी का 27 से 30 फीसदी मुसलमान है। सभी जिलों में मुस्लिम आबादी मौजूद है। तीन जिले मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर दिनाजपुर से मुसलमानों की आबादी आधी से अधिक है। वहीं, नौ जिलों में आबादी 20 से 50 फीसदी के करीब है। कम से कम 125 विधानसभा सीटों पर निर्णायक रूप से प्रभावी हैं। ऐसे में राज्य के चुनाव को लेकर ओवैसी और उनकी पार्टी नजर बनाए हुए है। कुछ समय पहले ऐसी खबरें भी सामने आई थी कि टीएमसी के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर की नई नवेली पार्टी के साथ AIMIM गठबंधन भी कर सकती है। यदि ऐसा हुआ तो ओवैसी पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी और TMC का खेला बिगाड़ सकते हैं।