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पाकिस्तान में चुनाव की तारीखों के ऐलान में देरी से लोग परेशान, साामने आई बड़ी वजह

Pakistan Election: पाकिस्तान की चुनाव आयोग ने देश में आम चुनाव का ऐलान कर दिया है। लेकिन अभी तक डेट घोषित नहीं की गई है। इस वजह से वहां के लोगों में बेचैनी बढ़ती जा रही है।  

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 akistan People upset due delay in announcement of election dates

पाकिस्तान की चुनाव आयोग ने देश में आम चुनाव का ऐलान कर दिया है। लेकिन अभी तक डेट घोषित नहीं की गई है। इस वजह से वहां के लोगों में बेचैनी बढ़ती जा रही है। लोगों के साथ ही देश की कई राजनीतिक पार्टियों के नेताओं की प्रतिक्रिया सामने आई है। वहीं, कुछ लोगों ने तारीखों का खुलासा न होने के पीछे का कारण भी बताया है।


चुनाव आयोग एक तारीख की घोषणा में विफल रहा- PPP

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो की पार्टी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) ने चुनाव की तारीखों का ऐलान न करने पर अफसोस जताया है। पीपीपी नेता शाज़िया मैरी ने कहा कि देश का चुनाव आयोग एक निश्चित तारीख की घोषणा करने में विफल रहा है। देश में एक समान अवसर, एक स्पष्ट और पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया की आवश्यक थी। चुनाव आयोग ने अभी तक कोई निश्चित तारीख नहीं दी है।

इमरान की पार्टी ने चुनाव आयोग पर उठाया सवाल

वहीं, 2018 के आम चुनाव में जीतकर देश की सत्ता पर काबिज होने वाली, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी ने चुनाव की तारीख की घोषणा करने के ईसीपी के अधिकार पर सवाल उठाया है। PTI नेता अली जफर के हवाले से कहा गया है, संविधान कहता है कि विधानसभा भंग होने के 90 दिनों के भीतर चुनाव कराए जाने चाहिए।


नवाज शरीफ की पार्टी ने किया स्वागत

वहीं, चुनाव आयोग के इस तरह के फैसले का वहां की पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) ने स्वागत किया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता अहसान इकबाल ने कहा कि पार्टी ईसीपी के फैसले का स्वागत करती है। इससे परिसीमन को लेकर अनिश्चितता खत्म हो गई है। सभी राजनीतिक दलों को अभी से तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। यह महत्वपूर्ण है कि चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से हो। एक स्थिर सरकार बने, जो देश को आर्थिक संकट से बाहर निकाले।


परिसीमन हो सकता है कारण


वहीं, जानकार मानते हैं कि चुनाव आयोग के इस फैसले के पीछे परिसीमन एक बड़ा कारण है। क्योंकि चुनाव आयोग चुनाव से पहले परिसीमन कराना चाहता है। क्योंकि पिछले चुनाव के मुकाबले इस समय देश की जनसंख्या बढ़ चुकी है। हालांकि इससे पहले भी पाकिस्तान के चुनाव आयोग की मंशा पर सवाल उठते रहे है।

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