
RSS प्रमुख मोहन भागवत (Photo-IANS)
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत कहा कि समाज में भ्रम फैलाकर जनजातीय और अन्य वर्गों को यह कहकर तोड़ने का प्रयास किया गया कि वे अलग हैं। सच्चाई यह है कि हजारों वर्षों से अखंड भारत में रहने वाले सभी लोगों का डीएनए एक है। उन्होंने यह बात शनिवार को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में सद्भावना बैठक में कही।
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि विविधता के बावजूद एकता ही हमारी पहचान है। बाहरी रूप से हम अलग दिख सकते हैं, लेकिन राष्ट्र, धर्म और संस्कृति के स्तर पर हम सभी एक हैं। इसी विविधता में एकता को स्वीकार करने वाला समाज हिंदू समाज है। हिंदू कोई संज्ञा नहीं, बल्कि एक स्वभाव है, जो मत, पूजा पद्धति या जीवनशैली के आधार पर झगड़ा नहीं करता।
सरसंघचालक ने कहा कि समाज को कानून से नियंत्रित तो किया जा सकता है, लेकिन जोड़कर चलाना हो या रखना हो तो सद्भावना ही उपाय है। उनका कहना था कि संकट के समय ही नहीं, बल्कि हर समय सद्भावना बनाए रखना जरूरी है। मिलना, संवाद करना और एक-दूसरे के कार्यों को जानना ही सद्भावना की पहली शर्त है।
बैठक के पहले सत्र में सरसंघचालक के साथ कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा व मध्यभारत प्रांत संघचालक अशोक पांडेय मौजूद रहे। इसमें मध्यभारत प्रांत के 16 जिलों से समाज के विभिन्न वर्गों और संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
Updated on:
04 Jan 2026 06:07 am
Published on:
04 Jan 2026 05:41 am
बड़ी खबरें
View Allबिहार चुनाव
राष्ट्रीय
ट्रेंडिंग
