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Amarnath Yatra 3 जुलाई से शुरू होगी, 15 अप्रैल से शुरू होगा रजिस्ट्रेशन, जान लें सभी डिटेल्स

Amarnath Yatra 2026 की शुरुआत 3 जुलाई से होगी और 28 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन समाप्त होगी। जानिए रजिस्ट्रेशन की तारीख, यात्रा के दोनों मार्ग, सुविधाएं और महत्वपूर्ण जानकारी, ताकि श्रद्धालु अपनी यात्रा की तैयारी आसानी से कर सकें और सुरक्षित तरीके से बाबा बर्फानी के दर्शन कर सकें।

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भारत

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Anurag Animesh

Apr 12, 2026

Amarnath Yatra

Amarnath Yatra

Amarnath Yatra Registration 2026: जम्मू-कश्मीर से एक अहम जानकारी सामने आई है। इस साल होने वाली पवित्र अमरनाथ यात्रा की तारीखों का आधिकारिक ऐलान कर दिया गया है। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा(Manoj Sinha) ने रविवार को बताया कि यह यात्रा 3 जुलाई 2026 से शुरू होगी और 28 अगस्त 2026, यानी रक्षाबंधन के दिन समाप्त होगी। कुल मिलाकर यह यात्रा 57 दिनों तक चलेगी। यात्रा की शुरुआत से पहले पारंपरिक ‘प्रथम पूजा’ 29 जून 2026 को ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन आयोजित की जाएगी। इस पूजा को भगवान शिव का आशीर्वाद लेने की शुरुआत माना जाता है।

रजिस्ट्रेशन कब और कैसे होगा?


यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया 15 अप्रैल से शुरू हो जाएगी। अच्छी बात यह है कि लोग ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से रजिस्ट्रेशन कर सकेंगे। देशभर में जम्मू-कश्मीर बैंक, पीएनबी, एसबीआई और यस बैंक की कुल 554 शाखाओं में यह सुविधा उपलब्ध रहेगी।

कहां स्थित है अमरनाथ गुफा?


अमरनाथ गुफा हिमालय की ऊंची पहाड़ियों में लगभग 3,888 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह गुफा दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले में आती है। हर साल हजारों श्रद्धालु देश-विदेश से यहां पहुंचते हैं। गुफा के अंदर बनने वाला बर्फ का शिवलिंग श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र होता है। खास बात यह है कि यह बर्फ का आकार चंद्रमा के घटने-बढ़ने के साथ बदलता रहता है, जिसे भक्त भगवान शिव की शक्ति का प्रतीक मानते हैं।

यात्रा के दो मुख्य रास्ते

पहलगाम मार्ग


यह पारंपरिक और काफी खूबसूरत रास्ता माना जाता है। यहां से यात्रा लगभग 34 किलोमीटर लंबी होती है और 3 से 5 दिनों में पूरी होती है। रास्ते में चंदनवारी, शेषनाग और पंचतरणी जैसे पड़ाव आते हैं। हालांकि, यह रास्ता थोड़ा कठिन है और इसमें पिस्सू टॉप और महागुणस पास जैसी चढ़ाइयां भी हैं, इसलिए अच्छी शारीरिक क्षमता जरूरी होती है।

बालटाल मार्ग


यह रास्ता छोटा है और करीब 14 किलोमीटर का ट्रैक है। कई श्रद्धालु इसी रास्ते से एक ही दिन में दर्शन कर वापस लौट आते हैं। जो लोग समय कम होने या कम दूरी तय करना चाहते हैं, उनके लिए यह बेहतर विकल्प माना जाता है।

यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं के लिए खाने-पीने की व्यवस्था (लंगर), टेंट और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। इसके अलावा, जिन लोगों के लिए ट्रैक करना मुश्किल होता है, उनके लिए हेलीकॉप्टर सेवा भी दोनों मार्गों पहलगाम और बालटाल से उपलब्ध रहती है।