
एयरक्राफ्ट को लेकर भारत-अमेरिका की बड़ी डील (फोटो में पीएम मोदी और यूएस प्रेसिडेंट ट्रंप)
GE Aerospace-HAL India Agreement: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अब भी बरकरार है। पाकिस्तान के इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच शांति वार्ता फेल होने के बाद मामला और भी ज्यादा गंभीर हो गया है। जो भी देश तेल-गैस के आयात पर निर्भर करते हैं, उनके लिए तो और भी ज्यादा चिंताजनक स्थिति है। पाकिस्तान, श्रीलंका और बांग्लादेश में तेल-गैस संकट साफ़ दिख रहा है। महंगाई आसमान छू रही है। लेकिन इस बीच भारत के लिए अच्छी खबर सामने आई है।
युद्ध जैसे हालात के बीच भारत और अमेरिका ने एक बड़ी रक्षा साझेदारी की है। दरअसल, अमेरिकी कंपनी GE एयरोस्पेस ने घोषणा की है कि वह भारतीय वायुसेना के तेजस लड़ाकू विमानों के इंजन की मरम्मत के लिए भारत में ही एक डिपो सुविधा स्थापित करेगी। इसके साथ ही HAL और GE के बीच F404-IN20 जेट इंजन के को-प्रोडक्शन पर तकनीकी बातचीत भी सफल रही है, जिसमें बड़ी मात्रा में तकनीक हस्तांतरण शामिल है। ये इंजन तेजस Mk2 और भारत के भविष्य के AMCA स्टील्थ फाइटर को शक्ति देंगे।
इस डील से भारत की रक्षा क्षमताएं मजबूत होंगी और विदेशी निर्भरता कम होगी, साथ ही विमान रखरखाव की प्रक्रिया भी तेज और आसान बन जाएगी। ऐसे में यह कदम न सिर्फ रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है, बल्कि भारत की ‘मेक इन इंडिया’ नीति को भी नई ताकत देता है।
इस समझौते के तहत इंजन डिपो का मालिकाना हक, संचालन और मेंटेनेंस पूरी तरह भारतीय वायुसेना (IAF) के पास होगा। वहीं GE एयरोस्पेस भारत को तकनीकी विशेषज्ञता, ट्रेनिंग और सपोर्ट स्टाफ उपलब्ध कराएगी। कंपनी यह भी सुनिश्चित करेगी कि जरूरी स्पेयर पार्ट्स और विशेष उपकरण समय पर मिलते रहें, ताकि इंजन की मरम्मत और रखरखाव में कोई दिक्कत न आए।
GE एयरोस्पेस की डिफेंस और सिस्टम्स सेल्स व बिजनेस डेवलपमेंट की वाइस प्रेसिडेंट रीटा फ्लेहर्टी ने कहा कि यह साझेदारी भारत की सेनाओं को लगातार सहयोग देने की कंपनी की प्रतिबद्धता को दिखाती है। उन्होंने बताया कि यह नई सुविधा तेजस फ्लीट के F404-IN20 इंजनों की उपलब्धता बढ़ाने में मदद करेगी, जिससे भारतीय वायुसेना को समय पर आधुनिक तकनीक मिल सकेगी।
GE एयरोस्पेस ने भारत के रक्षा क्षेत्र में अपनी मजबूत मौजूदगी पर भी जोर दिया। इसके इंजन कई अहम प्लेटफॉर्म्स में इस्तेमाल होते हैं, जैसे भारतीय नौसेना का P-8I समुद्री गश्ती विमान और MH-60R हेलीकॉप्टर, साथ ही भारतीय वायुसेना का AH-64 अपाची हेलीकॉप्टर।
इसके अलावा, कंपनी के LM2500 मरीन गैस टर्बाइन INS विक्रांत विमानवाहक पोत और P-17 शिवालिक-क्लास फ्रिगेट में भी लगाए जाते हैं। GE पिछले 40 सालों से भारत के विमानन क्षेत्र में काम कर रही है। इसकी पुणे फैक्ट्री और 13 घरेलू साझेदार मिलकर इसकी वैश्विक सप्लाई चेन का हिस्सा हैं, जिससे भारत में इसकी मौजूदगी और मजबूत हुई है।
Updated on:
13 Apr 2026 04:57 pm
Published on:
13 Apr 2026 04:48 pm
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