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विशाखापट्टनम में ‘पानी में तैरता सोलर पावर प्लांट’ हुआ शुरू, हर साल 42 लाख यूनिट बिजली का होगा उत्पादन

आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में 'पानी में तैरता सोलर पावर प्लांट' (फ्लोटिंग सोलर पैनल परियोजना) की शुरुआत की गई है, जिससे हर साल 42 लाख यूनिट बिजली का उत्पादन होगा। इसके साथ ही फ्लोटिंग सोलर पैनल परियोजना के जरिए 54,000 टन कोयले की बचत होगी।

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Abhishek Kumar Tripathi

Jul 23, 2022

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Andhra Pradesh Visakhapatnam floating solar power plant drone visuals, 42 lakh units of electricity will be produced

आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम के मेघाद्री गेड्डा जलाशय में 'पानी में तैरता सोलर पावर प्लांट' (फ्लोटिंग सोलर पैनल परियोजना) की शुरुआत की गई है। ग्रेटर विशाखापत्तनम नगर निगम के आयुक्त जी लक्ष्मीशा बताया कि यह 12 एकड़ के क्षेत्र में फैला हुआ है, जो हर साल 42 लाख यूनिट बिजली का उत्पादन करेगा। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट के जरिए बिजली उत्पादन से 54,000 टन कोयले की बचत हो सकेगी। इसके साथ ही हर साल 3,022 टन उत्सर्जन में भी कमी आएगी।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार तेलंगाना के रामागुंडम में भारत की सबसे बड़ी फ्लोटिंग सोलर पैनल परियोजना को शुरुआत की गई है, जिसके पूरी तरह से चालू होने के कुछ हफ्ते बाद विशाखापत्तनम में यह 'पानी में तैरता सोलर पावर प्लांट' लगाया गया है। पॉवर मिनिस्ट्री के अनुसार रामागुंडम में 100 मेगावाट की फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट को एडवांस तकनीक के साथ बनाया गया है, जो देश की अग्रणी सार्वजनिक क्षेत्र की बिजली उत्पादक है।


देश का सबसे बड़ा पानी में तैरता सोलर पावर प्लांट

देश का सबसे बड़ा पानी में तैरता सोलर पावर प्लांट रामागुंडम में है, जो जलाशय के 500 एकड़ में फैला हुई है। 100 मेगावाट के इस फ्लोटिंग सोलर प्लांट को भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) ने 423 करोड़ रुपए की लागत से बनाया है।


भूमि अधिग्रहण की नहीं होती है आवश्यकता

फ्लोटिंग सोलर पैनल परियोजना लगाने के लिए किसी भी जमीन के बड़े भू-भाग को अधिग्रहण नहीं करना पड़ता है। इसके साथ ही अधिक अच्छा भी होता है, जो पैनल को नीचे से ठंडा रखता है और पानी के वाष्पीकरण को भी कम करता है। पानी के वाष्पीकरण कम होने से जल विद्युत उत्पादन के लिए अधिक पानी की बचत हो पाती है।