शीर्ष अदालत ने 9 सितंबर, 2021 को DMRC के खिलाफ लागू होने वाले 2017 के मध्यस्थता न्यायाधिकरण के आदेश को बरकरार रखा था। इसने दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को कैसिंल कर दिया था। मध्यस्थता न्यायाधिकरण के आदेश के अनुसार, DAMEPL रियायत समझौते के संदर्भ में 2782.33 करोड़ रुपये और ब्याज का हकदार था। 14 फरवरी 2022 तक यह रकम बढ़कर 8,009.38 करोड़ रुपये हो गई।