
अनिता आर. राधाकृष्णन को TVK ने बताया 'मौकापरस्त'(फोटो-ANI)
Tamil Nadu Politics: तमिलनाडु के मंत्री के. ए. सेंगोट्टैयन ने डीएमके सरकार में मंत्री रहे अनिता आर. राधाकृष्णन के आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि टीवीके को अपने अस्तित्व या सरकार बचाने के लिए उनके जैसे नेताओं की जरूरत नहीं है।
सेंगोट्टैयन ने कहा कि अनिता राधाकृष्णन के खिलाफ मानहानि मामले में अग्रिम जमानत नहीं मिली थी जिसके बाद पुलिस ने उनसे पूछताछ कर मामला दर्ज किया है। मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि राधाकृष्णन का राजनीतिक रिकॉर्ड परिस्थितियों के हिसाब से दल बदलने का रहा है।
तमिलनाडु के मंत्री के.ए. सेंगोट्टैयन ने कहा कि तमिलनाडु वेत्री कझगम (TVK) ऐसी हालत में नहीं है कि उसे आंदोलन या सरकार बचाने के लिए अनीता राधाकृष्णन जैसे लोगों की पार्टी में शामिल होने की जरूरत हो। उन्होंने मानहानि के एक केस में एंटीसिपेटरी बेल के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन उसे मना कर दिया गया। उसके बाद, पुलिस ने उन्हें पूछताछ के लिए हिरासत में लिया और उनके खिलाफ केस दर्ज किया। तब से, वह अपनी मर्जी से अपने विचार रख रहे हैं।
के.ए. सेंगोट्टैयन ने आगे कहा कि उनके हर बयान का जवाब देना हमारे लिए मुमकिन नहीं है। अनीता राधाकृष्णन ने अपना पॉलिटिकल करियर AIADMK से शुरू किया था। उन्होंने उस पार्टी में MLA और मिनिस्टर दोनों के तौर पर काम किया। बाद में, पॉलिटिकल हालात की वजह से, उन्होंने AIADMK छोड़ दी, DMK में शामिल हो गए, और वहां भी मिनिस्टर बने। उनके पॉलिटिकल व्यवहार को देखते हुए, ऐसा लगता है कि वह ऐसे इंसान हैं जो हालात के हिसाब से अपनी बात बदल लेते हैं।
एक दिन पहले ही डीएमके विधायक अनिता आर राधाकृष्णन को शनिवार को चिदंबरम के न्यायिक मजिस्ट्रेट ने जमानत दे दी। उन पर 20 जून को आयोजित एक सार्वजनिक सभा के दौरान तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. विजय जोसेफ के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी करने का आरोप है। इसी मामले में दर्ज केस के आधार पर अथूर पुलिस ने उन्हें शुक्रवार को गिरफ्तार किया था।
गिरफ्तारी के बाद मीडिया से बातचीत में राधाकृष्णन ने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ की गई कार्रवाई राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश है। उन्होंने दावा किया कि टीवीके (TVK) के कुछ लोग उन पर विधायक पद से इस्तीफा देने और डीएमके छोड़कर उनकी पार्टी में शामिल होने का दबाव बना रहे हैं। राधाकृष्णन ने कहा कि उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि यदि वे डीएमके छोड़कर TVK में शामिल होते हैं तो उन्हें पूरा समर्थन मिलेगा। हालांकि उन्होंने इन प्रस्तावों को ठुकराने की बात कही।
उन्होंने डीएमके अध्यक्ष एम.के. स्टालिन के प्रति अपनी निष्ठा दोहराते हुए कहा कि वह पार्टी नहीं छोड़ेंगे और किसी भी तरह के दबाव के आगे झुकने का सवाल ही नहीं उठता। डीएमके विधायक ने यह भी कहा कि उनका राजनीतिक सफर वर्षों की पार्टी सेवा का परिणाम है और उन्होंने अपनी पहचान किसी आर्थिक ताकत के दम पर नहीं बनाई है।
Updated on:
04 Jul 2026 07:49 pm
Published on:
04 Jul 2026 07:27 pm
