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जम्मू-कश्मीर विवादित किताब मामले में बड़ा एक्शन, LG मनोज सिन्हा ने 8 अधिकारियों को किया सस्पेंड

जम्मू-कश्मीर में विवादित किताब मामले पर LG मनोज सिन्हा ने बड़ा एक्शन लिया है। 8 अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया है।
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श्रीनगर

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Rahul Yadav

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Saurabh Kumar Mall

Jul 04, 2026

LG MANOJ SINHA

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा (इमेज सोर्स: आईएएनएस)

Jammu Kashmir Controversial Book: जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी में विवादित किताब के मामले में बड़ा एक्शन लिया है। उन्होंने 8 अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने और मामले से जुड़े संविदा कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त करने के आदेश दिए हैं। यह कार्रवाई किताब को लेकर उठे विवाद के बाद की गई है।

स्कूलों की लाइब्रेरी में पहुंचीं विवादित किताबें, मचा बवाल

दरअसल पूरा विवाद की जड़ जम्मू-कश्मीर के सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी में पहुंची दो किताबों से खड़ा हुआ है। इन किताबों में कथित तौर पर अलगाववाद और आतंकवाद से जुड़ा आपत्तिजनक कंटेंट मिला। मामला सामने आते ही उपराज्यपाल ने सख्त कदम उठाए। आठ अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया। एक संविदा कर्मचारी की सेवा भी खत्म कर दी गई। साथ ही पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए गए हैं।

जांच में सामने आई बड़ी लापरवाही

यह मामला समग्र शिक्षा लाइब्रेरी ग्रांट के तहत किताबों की खरीद से जुड़ा है। सरकार ने 1,832 सरकारी स्कूलों और 394 पीएम श्री स्कूलों की लाइब्रेरी के लिए उम्र के अनुसार किताबें खरीदने की योजना बनाई थी। इसके लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) जारी किया गया था।

किताबों के चयन के लिए जम्मू और कश्मीर दोनों डिवीजनों के विशेषज्ञों और शिक्षाविदों की चार सब-कमेटियां बनाई गई थीं। इन कमेटियों ने 364 प्रकाशकों की ओर से भेजी गई 463 किताबों का चयन किया।

बाद में पता चला कि इनमें शामिल दो किताबों में गंभीर आपत्तिजनक सामग्री है। पहली किताब "Personalities and Legends of J&K" थी। इसे डॉ. हिलाल अहमद और संतोष मीणा ने लिखा था। दूसरी किताब "Great Personalities of Jammu and Kashmir" थी। इसके लेखक डॉ. सुशांत गिरी हैं।

सरकार के अनुसार, पहली किताब की 123 प्रतियां जम्मू, रामबन और उधमपुर के स्कूलों में भेजी गई थीं। दूसरी किताब की 128 प्रतियां जम्मू और बारामूला के स्कूलों में पहुंच चुकी थीं।

सरकार ने 3 जुलाई 2026 को दोनों किताबों को तुरंत वापस लेने का आदेश जारी कर दिया। जांच में माना गया कि किताबों की सिफारिश करते समय संबंधित अधिकारियों ने गंभीर लापरवाही बरती। सही जांच-पड़ताल नहीं की गई। आदेश में कहा गया कि इस तरह की सामग्री कानून-व्यवस्था की स्थिति भी पैदा कर सकती थी।

आठ अधिकारी सस्पेंड

मामले की गंभीरता को देखते हुए आठ अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। इनमें समग्र शिक्षा, स्कूल शिक्षा विभाग, एससीईआरटी और विभिन्न सरकारी स्कूलों के अधिकारी और व्याख्याता शामिल हैं। निलंबन अवधि के दौरान सभी अधिकारी स्कूल शिक्षा विभाग से जुड़े रहेंगे। समग्र शिक्षा से जुड़े कंप्यूटर सहायक शेख सुहेल अहमद की संविदा सेवा भी तत्काल समाप्त कर दी गई है।

सरकार ने इस पूरे मामले की जांच के लिए अतिरिक्त मुख्य सचिव अश्विनी कुमार (आईएएस) को जांच अधिकारी नियुक्त किया है। वहीं, सामान्य प्रशासन विभाग के अतिरिक्त सचिव रोहित शर्मा को प्रस्तुत अधिकारी बनाया गया है। जांच रिपोर्ट 30 दिनों के भीतर सरकार को सौंपनी होगी। सरकार ने दोनों किताबों के लेखकों और प्रकाशकों को भी जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश में प्रतिबंधित और ब्लैकलिस्ट करने का फैसला लिया है।

नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने मामले पर दी तीखी प्रतिक्रिया

इस बीच, जम्मू-कश्मीर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने भी मामले पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि किताबों में आतंकवादियों और अलगाववादी नेताओं को "महान हस्तियों" के रूप में पेश किया गया है। उनका दावा है कि एक किताब में 26/11 मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड हाफिज सईद की प्रशंसा की गई है और जम्मू-कश्मीर को "भारत के कब्जे वाला कश्मीर" बताया गया है।

सुनील शर्मा ने इसे गंभीर अपराध बताते हुए कहा कि ऐसी किताबों पर तुरंत प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। उन्होंने लेखक, प्रकाशक, एक्सपर्ट कमेटी और संबंधित अधिकारियों के साथ-साथ शिक्षा मंत्री की जवाबदेही तय करने की भी मांग की। साथ ही उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की।