
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला। (Photo - IANS)
Jammu Kashmir Controversial Book: जम्मू-कश्मीर सरकार ने देश विरोधी सामग्री होने के आरोपों के बाद सभी सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी से एक विवादित किताब वापस लेने का फैसला लिया है। स्कूल शिक्षा विभाग ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही, इस किताब को मंजूरी देने, उसकी खरीद और स्कूलों में वितरण के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है। विभाग के कमिश्नर सेक्रेटरी ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि इस संबंध में जल्द ही औपचारिक आदेश जारी किया जाएगा।
कुछ दिनों पहले सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर इस किताब का कुछ कंटेंट सामने आया था। लोगों ने दावा किया कि इसमें देश विरोधी बातें लिखी गई हैं जो युवा पीढ़ी के मन में गलत विचार डाल सकती हैं।
अभिभावक, शिक्षक और कई संगठनों ने सरकार से इस पर तुरंत कार्रवाई की मांग की। मामला गरमाते ही स्कूल शिक्षा विभाग सक्रिय हुआ। विभाग के कमिश्नर सेक्रेटरी ने पुष्टि की कि किताब को स्कूलों से हटाने का औपचारिक आदेश जल्द जारी होगा।
साथ ही, जिन अधिकारियों ने इस किताब को मंजूरी दी, खरीदी और स्कूलों तक पहुंचाई, उनके खिलाफ विभागीय जांच और अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
राज्य सरकार का रुख साफ है- बच्चों की शिक्षा में किसी भी तरह की देश विरोधी सामग्री बर्दाश्त नहीं की जाएगी। शिक्षा विभाग ने सभी जिलों के शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपनी-अपनी लाइब्रेरी चेक करें और इस किताब की एक भी कॉपी न रहने दें।
जांच में यह भी देखा जाएगा कि किताब खरीदने के लिए कितना पैसा खर्च किया गया और किस प्रक्रिया से इसे मंजूरी मिली। सूत्रों के मुताबिक, कई अधिकारियों की लापरवाही सामने आ सकती है। अगर जानबूझकर गलती पाई गई तो उनकी नौकरी भी दांव पर लग सकती है।
अभी पूरा फोकस जांच पर है। अगर कोई बड़ी लापरवाही निकली तो बड़े स्तर पर बदलाव हो सकते हैं। इस बीच स्कूलों में किताब हटाने का काम तेजी से चल रहा है।
सरकार का यह फैसला न सिर्फ विवाद को शांत करने वाला है बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
Updated on:
04 Jul 2026 05:19 pm
Published on:
04 Jul 2026 04:51 pm
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