अन्ना ने आरटीआई में किए गए संशोधनों को गैर-कानूनी और आरटीआई अधिनियम 2005 की भावना के खिलाफ बताया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ये संशोधन 12 जून को किए गए थे। अन्ना का मानना है कि महाराष्ट्र सरकार द्वारा किए गए बदलाव आम नागरिकों को सूचना प्राप्त करने से दूर रखेंगे। इसके अलावा अन्ना इस बात से भी नाराज़ हैं कि सरकार ने आरटीआई के तहत सूचना प्राप्त करने के लिए फीस बढ़ा दी है। अन्ना ने इस पर आपत्ति जताई और कहा कि फीस बढ़ाने के लिए कोई ठोस वजह या वित्तीय विश्लेषण नहीं दिया गया है। उनका कहना है कि आरटीआई कोई कमाई करने वाला कानून नहीं है। अगर 20 साल बाद इसकी फीस बढ़ाई जा रही है, तो जानकारी देने से इनकार करने वाले अधिकारियों पर लगने वाला जुर्माना भी बढ़ाया जाना चाहिए।
इसके अलावा महाराष्ट्र सरकार ने अब आवेदक का पहचान पत्र अनिवार्य कर दिया है, जिसे अन्ना ने खतरनाक बताया है। उनके अनुसार यह व्हिसलब्लोअर्स और कार्यकर्ताओं की सुरक्षा को खतरे में डालता है।
अन्ना ने अन्य संशोधनों जैसे आवेदक की अनुपस्थिति में अपील खारिज करना, मृत्यु पर केस खुद ही बंद करना और सूचना आयोग में कानूनी सहायता पर रोक पर भी नाराज़गी जताई है। उन्होंने कहा कि ये नए बदलाव नागरिकों पर बोझ डालते हैं, न कि व्यवस्था को आसान बनाते हैं और सरकार के इसी फैसले से नाराज़ होकर अन्ना ने अनशन की चेतावनी दी है।